Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

सामाजिक

माँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर 

भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता

Read More
धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋतु परिवर्तन का लोकउत्सव: लोहड़ी और नई ऋतु की दस्तक

भारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं।

Read More
शिक्षा एवं व्यवसाय

विश्वविद्यालय, सत्ता और साहित्य की अपमानित गरिमा

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ

Read More
राजनीति

सड़क दुर्घटना मुआवज़ा और संविधान : आय से परे मानवीय गरिमा की तलाश

सड़क दुर्घटना मुआवज़े की तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के मूल दर्शन—समता, गरिमा और कल्याणकारी

Read More