लेख स्वास्थ्य

विश्व कैंसर दिवस:कैंसर से हारना नहीं, उसे हराना है !

अनीता ( बदला हुआ नाम ) 45 वर्षीय ग्रहणी है और दो जवान बच्चों की माँ है। एक दिन नहाते हुए अपने स्तन की जांच कर रही थी तो उसे मटर के दाने के आकर के सामान एक गाँठ महसूस हुई, तो वो एक पल के लिए ठिठुर गई, कुछ घबरा सी गयी। सोचने लगी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वर्णाश्रम एवं चातुर्वर्ण्य

वैदिक परम्परा में वर्णाश्रम धर्म एवं चार वर्णों को आधार माना जाता है । परन्तु वर्तमान में इसका जो रूप हमें दिखायी देता है, वह शास्त्रों की परिभाषा के विपरीत है । वर्णाश्रम व्यवस्था एवं चातुर्वर्ण्य व्यवस्था सदैव ही समाज में रही है और रहेगी । अगर हम कहें कि वैश्‍विक किरणें ( cosmic rays) […]

भाषा-साहित्य

साहित्य बौद्धिक स्तर को बढ़ाने की पुड़िया है

सोचिए साहित्य न होता तो? ज्ञान का स्तर बुद्धि के नक्शे में नीचे की सतह पर मृत्युशैया पर लेटा होता। साहित्य समाज का दर्पण है। हर भाव, हर रस, रुप, रंग, विचार और घटनाओं को अभिव्यक्त करने का ज़रिया है साहित्य। साहित्य का आगमन वो क्रान्ति है जिसने प्रबुद्ध लेखकों को अपनी कल्पना और विचारों […]

सामाजिक

दुनियां में माता पिता का अपनी संतान से रिश्ता सबसे अनमोल है

भारत की मिट्टी में ही संस्कार है। भारत में जिस प्रकार के संस्कार, भाव, आस्था परोपकार और जैसी भावना है, ऐसी हमें वैश्विक स्तर पर कहीं दिखाई नहीं देगी ऐसा मेरा मानना है। क्योंकि भारत की मिट्टी में ही ऐसे भाव होते हैं कि यहां रहने वाला हर वासी स्वभाविक ही ऐसे भाव से ओतप्रोत […]

सामाजिक

अपनों के लिए वक्त को.. रुकना तो चाहिए

आजकल हर इंसान अपने जीवन में जिस प्रकार भागा दौड़ी कर रहा है और भाग रहा है अपने लक्ष्य और अपने गंतव्य की ओर.. सबसे ज्यादा नुकसान उसके उन रिश्तो को ही हो रहा है जिनके लिए वह यह भागा दौड़ी और अथक परिश्रम कर रहा है। उसने इस अंधाधुंध सफर का चुनाव जिनके लिए […]

राजनीति

चुनावी चाशनी में डूबा संतुलित बजट

वित्त वर्ष 2023-24 के बजट पर पूरे देश की नजरें केन्द्रित थी क्योंकि आम आदमी को इस बजट से ढ़ेर सारी उम्मीदें थी। दरअसल माना जा रहा था कि इस वर्ष होने जा रहे कई विधानसभा चुनावों के साथ-साथ अगले वर्ष लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बजट में आम जनता के लिए राहतों का पिटारा खोला […]

सामाजिक

बालिकाओं में शिक्षा के बाद परिवर्तन व नारी का स्थान

आज के समय में शिक्षा का खूब – खूब विस्तार हुआ है । इसके विस्तार के परिणामस्वरूप बालिकाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है | बालिकायें शिक्षा प्राप्त करने के बाद घर , समाज आदि कीउन्नति में तो अपना अमूल्य योगदान दे रही है ही साथ में राष्ट्र के विकास में भी अपना शीर्ष पद पर सेवायें दे कर देश के सही से निर्माणमें व विश्व पटल पर सेवायें देकर अपनी अलग पहचान क़ायम की है । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यालय में सेवाये हो याराष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , वितमंत्री आदि जैसे पद हो हर जगह कही न कही हम महिलाओं को देख सकते है । बालिकायें शिक्षा ग्रहण करआगे शादी के बाद  महिलाओं के रूप में पुरूषों के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चलती है । औरत:-और का अर्थ है :- आत्माबली , संकल्प पूरक । र का अर्थ है:- ऊर्जा वर्धक ।त का अर्थ है:- सरस्वती – स्वरुप। औरत शब्द में इतनी – इतनी विषेशताए होती है । इसअर्थ की सही से सार्थकता कब नजर आती है  जब एक मकान घर बन जाता है और घर एक मंदिर बन जाता है। भारतीय संस्कृति में नारीके सम्मान को हम ऐतिहासिक स्तर पर भी देख सकते है। जब में भारतीय संस्कृति की बात करता हूं तो जैन, बौद्ध, वैदिक सभी परंपराएंआ जाती है। जन्हा स्त्री की पूजा होती है वन्हा देवता रमण करते है, यह उदात स्वर भारतीय परंपरा का रहा है। जैन परंपरा की बात करेतो आदि पुरुष भगवान ऋषभ माता मरूदेवा का आदेश का कितना सम्मान करते थे वह उस घटना से पता लगता है जब युगल में उसका पुरुष साथी आश्चर्यजनक घटना में  उसकी जीवन यात्रा शेष हो जाती है और माता कहती है इसका विवाह ऋषभ के साथ कर दो। जैनपरम्परा उक्त घटना को विवाह संस्था का उदय मानती है। ऋषभ ने अपनी पुत्री ब्राह्मी को लिपि कला और सुंदरी को गणित की कलासिखाई। 16 महासतियो का वर्णन जैन परम्परा में नारी जाति के प्रति अत्यंत सम्मान को दिखाता है। तीर्थंकर परंपरा में श्वेताबारसंप्रदाय 19 वे तीर्थंकर मल्लिनाथ को स्त्री को सर्वोच्च आध्यात्मिक पद देना स्वीकृत करता है। भगवान महावीर ने चंदनबाला का उद्धारकरके उनको 36000 साध्वियों की प्रमुख बनाया। विनोबा भावे के शब्दो में भगवान महावीर ने नारी जाति को जो अधिकार दिए वे कोईसाधारण नही थे। जो साहस महावीर ने दिखाया वह बुद्ध में नही दिखाई दिए। यह विनोबा जी का मानना है। तेरापंथ का गौरवशालीइतिहास देखे तो आचार्य भिक्षु के समय खंडित लड्डू को पूर्ण करने वाली तीन साध्वियों ने संवत 1821 में अपना साहस और शौर्यदिखाया। भिक्षु स्वामी ने उनको सचेत किया एक भी कालधर्म को प्राप्त हुई तो शेष दो को संलेखना का मार्ग अपनाना होगा। वे अडिगरही है । जयाचार्य ने साध्वी सरादरां जी को तैयार किया और प्रथम साध्वी प्रमूखा बनाया और नारी जाति का कितना सम्मान बढ़ाया।यह परंपरा गतिशील रही। नवम अधिशास्ता आचार्य तुलसी ने नारी की चेतना को विकसित करने में नए आयाम स्थापित किए। नयामोड़ आंदोलन से सुप्तता को मिटाया और विकास की नई उड़ान भरने का आकाश दिया। विकास मूल्यों के साथ हो यह उनकी विशेषप्रेरणा रही। पूर्व साध्वी प्रमुखा श्री कनक प्रभा जी आचार्य श्री तुलसी की कृति है । आचार्य श्री महाश्रमण जी ने उनको शासन माता केगौरवमयी स्थान पर आसीन किया था । वर्तमान नवम् साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुत विभा जी को आचार्य श्री महाश्रमण जी ने नियुक्त कियाहै । महिलाओं में क्षमता भी होती है और अनेकों नैसर्गिक गुण भी। ममता, सहज वात्सलय, करुणा, पृथ्वी के समान सहिष्णुता, दृढ़संकल्प शक्ति भी विद्यमान रहते है। संस्कार निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशिष्ट होती है। नारी और नर एक गाड़ी के 2 पहियें हैं ।दोनो एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। दोनों की एकरूपता ही पूर्ण विकास है। नारी सद्गुणों की खान हैं । वहीं नर भी नारायण से किसी सेकम नहीं है । दोनों का युगल ही सृष्टि का सृजनहार है। यत्र नार्यस्तु पूज्यंते,रमन्ते तत्र देवता । नारी के अंदर बसे नारित्व के गुणों काध्यान आता है| वात्सल्य, स्नेह, ममता, दया, करुणा, बलिदान, सहनशीलता, लज्जा, हिम्मत, शील आदि अनेक गुणों को आत्मसातकिया हे नारित्व ने| इन सारे गुणों को धारण करने वाली समस्त नारी जाति को मेरा नमन| — प्रदीप छाजेड़ 

पर्यावरण

वर्टिकल फॉरेस्ट : गगनचुंबी इमारतों में लहलहाते जंगल

प्रकृति सृष्टि रचना का आधार है। प्रकृति आनंद का उत्स है। प्रकृति दिव्यतम है, अन्यतम है। वह प्रीतिकर स्नेह रसागार है। प्रकृति जीवन-राग का मधुर आलाप है, आलंबन है। प्रकृति की परिधि से परे कुछ भी नहीं। प्रकृति रोग-शोक नाशक है। प्रकृति प्राण प्रदायिनी अधिष्ठात्री देवी है। प्रकृति का अस्तित्व न केवल मानव अपितु समस्त […]

सामाजिक

आधुनिकरण ने रिश्तों की मर्यादा ही ख़त्म कर दी

माना कि ज़िंदगी की जद्दोजहद से जूझते इंसान को कुछ पल खुशियों के, हँसी मजाक के चाहिए होते है जिसका सोशल मीडिया बहुत सुंदर माध्यम है। सोशल मीडिया पर हमें सारी सामग्री मिल जाती है, अच्छी बात है। तो आज बात करते है लोगों को एंटरटेन करने वाले मिम्स और विडियोज़ की। आज तक सिर्फ़ […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

जयंतिया समुदाय का जन – जीवन

जयंतिया हिल्स का भौगोलिक स्वरूप पर्वतराज हिमालय से जुड़ा हुआ है। राजनीतिक रूप से यह मेघालय राज्य का एक जिला है जो जुलाई 2012 से ईस्ट जयंतिया हिल्स और वेस्ट जयंतिया हिल्स नामक दो जिलों से नामित है। प्राकृतिक रूप से यह उपोष्णकटिबंधीय वनों से आच्छादित है। मेगालिथिक (मोनोलिथ) पत्थरों का संग्रह अतीतकालीन समन्वय का […]