Author: *किशन भावनानी

कविता

शख्स नहीं,शख्सियत बनकर जिएँ

आओ शख्स बनकर नहीं,शख्सियत बनकर जीना सीखें,अपने कर्मों से हर दिल में उजियारा बोना सीखें।नाम नहीं,नेकियों की खुशबू पहचान बनेऐसा

Read More
कविता

हर ख़्वाब परिपूर्ण नहीं होता

चाहने से हर ख़्वाब,तक़दीर का हिस्सा नहीं होता,हर मुस्कान के पीछे,ख़ुशियों का किस्सा नहीं होता।दिल तो चाहता है,हर मंज़िल कदमों

Read More