Author: *किशन भावनानी

कविता

खुलकर हँसना, मुस्कुराना, मन का सुंदर श्रृंगार

पहले के युग में हँसी थी,रिश्तों का मधुर गान,छोटी-छोटी खुशियों में बसता था सारा जहान।आज सुविधाएँ बढ़ीं,पर मन क्यों रहता

Read More
गीत/नवगीत

माता-पिता की शरण में अनंत वैकुण्ठ सुख समाया

माता-पिता की शरण में,अनंत वैकुण्ठ सुख समाया है,उनके चरणों में ही जीवन का सच्चा उजियारा छाया है।मंदिर-मस्जिद, तीर्थ सभी अपनी-अपनी

Read More