स्वयं को जीतने की राह
जो रोज़ स्वयं को परखता,वही निखरता जाता है,अपनी हर कमी को समझकर, सुधारता जाता है।दर्पण में खुद का चेहरा नहीं,चरित्र
Read Moreजो रोज़ स्वयं को परखता,वही निखरता जाता है,अपनी हर कमी को समझकर, सुधारता जाता है।दर्पण में खुद का चेहरा नहीं,चरित्र
Read Moreबच्चे मन के सच्चे,निर्मल इनके भाव,हँसी बाँटते जग में,मिटा देते हर घाव।न छल-कपट की भाषा,न मन में कोई भार,इनकी मासूमियत
Read Moreशरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,गलती को सीख
Read Moreजीवन का असल मूल्य मोह माया से नहीं पहचाना जाता,यह तो अच्छे कर्मों से हर पल सजाया जाता।जो बाँट सके
Read Moreजिसने भजन-सिमरन में मन लगाया,उसने जीवन का धन सच्चा पाया,मानव सेवा में सुख जिसने बाँटा,उसने हर पल ईश्वर को मुस्कुराया।
Read Moreजीवन की सार्थकता पहचान,स्वयं को यूँ न व्यर्थ गँवाएँ,लक्ष्य बनाकर मन में अपने,हर दिन आगे कदम बढ़ाएँ,राह कठिन हो,धूप कड़ी
Read Moreकर्मों का बोझ जब दिल को सताता है,हर रास्ता धुंधला-सा नज़र आता है,सतगुरु की रहमत जब सिर पर बरसती है,भारी
Read Moreज़िंदगी किराए का मकान है,ठहरना बस कुछ पल है,आज अपना लगता है जो,कल वही सफ़र है।न मोह को इतना पालो
Read Moreऊपरवाला जब खाता खोलेगा,दिखावा नहीं,कर्म देखेगा।कितने तीर्थ गए,नहीं देखेगा,किसका दिल दुखाया,देखेगा। केदारनाथ गए कितनी बार,हरिद्वार गए कितनी बार,मंदिरों का हिसाब
Read Moreपरिवार ने स्नेह दिया,तो मित्रों ने हौसला बढ़ाया,शिक्षक ने ज्ञान का दीप जलाकर,जीवन-पथ समझाया।समाज ने अपने अनुभवों से,कितने सबक सिखाए,बुजुर्गों
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