खुलकर हँसना, मुस्कुराना, मन का सुंदर श्रृंगार
पहले के युग में हँसी थी,रिश्तों का मधुर गान,छोटी-छोटी खुशियों में बसता था सारा जहान।आज सुविधाएँ बढ़ीं,पर मन क्यों रहता
Read Moreपहले के युग में हँसी थी,रिश्तों का मधुर गान,छोटी-छोटी खुशियों में बसता था सारा जहान।आज सुविधाएँ बढ़ीं,पर मन क्यों रहता
Read Moreमाता-पिता की शरण में,अनंत वैकुण्ठ सुख समाया है,उनके चरणों में ही जीवन का सच्चा उजियारा छाया है।मंदिर-मस्जिद, तीर्थ सभी अपनी-अपनी
Read Moreभावना को समझने के लिए मन चाहिए,दुखों को समझने के लिए अपनापन चाहिए।ईश्वर को समझने के लिए श्रद्धा चाहिए,और इंसान
Read Moreअपने भीतर करुणा रखिए,आवेश को दूर बहा दीजिए,बादल बनकर जीवन को शीतलता का वर दीजिए।वर्षा की कोमल बूँदों से ही
Read Moreतेरा भाणा मीठा लागे, हर पल तेरा नाम,सुख हो चाहे दुःख की बेला, तू ही मेरा धाम।तेरी रज़ा में शांति
Read Moreजो बेफ़िक्र मिज़ाज रखते हैं,वो आंधियों में भी रोशनी रखते हैं।जिनको कल की सोच नहीं,वो आज में ही इतिहास रचते
Read Moreधैर्य कभी मत छोड़िए,मंज़िल खुद राह दिखाएगीसही समय का इंतज़ार करना सीखिए,किस्मत भी मुस्कुराएगीसमय से पहले तोड़ा हुआ फल हमेशा
Read Moreकिसी का बुरा करके अपनी जीत मत समझना,किसी का भला करके अपना एहसान मत जताना।जो बोओगे वही एक दिन जीवन
Read Moreसतगुरु से बड़ा कोई मीत नहीं,अरदास से बेहतर कोई गीत नहीं।एक बार सच्चे मन से याद तो कर,सूना जीवन भी
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