Author: *किशन भावनानी

कविता

बच्चोँ क़ो मारें नहीं, प्यार से सँवारें

शरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,गलती को सीख

Read More
कविता

कविता – ऊपरवाला जब हिसाब करेगा

ऊपरवाला जब खाता खोलेगा,दिखावा नहीं,कर्म देखेगा।कितने तीर्थ गए,नहीं देखेगा,किसका दिल दुखाया,देखेगा। केदारनाथ गए कितनी बार,हरिद्वार गए कितनी बार,मंदिरों का हिसाब

Read More
कविता

कविता – राह दिखाने वाले बहुत मिलेंगे,पर चलना स्वयं पड़ेगा

परिवार ने स्नेह दिया,तो मित्रों ने हौसला बढ़ाया,शिक्षक ने ज्ञान का दीप जलाकर,जीवन-पथ समझाया।समाज ने अपने अनुभवों से,कितने सबक सिखाए,बुजुर्गों

Read More