कागज पर हरा, लेकिन कितना स्वस्थ? भारत में वन डेटा पर पुनर्विचार
भारत अक्सर राष्ट्रीय और वैश्विक रिपोर्टों में उत्साहवर्धक आंकड़ों का हवाला देते हुए अपने बढ़ते वन क्षेत्र का जश्न मनाता
Read Moreभारत अक्सर राष्ट्रीय और वैश्विक रिपोर्टों में उत्साहवर्धक आंकड़ों का हवाला देते हुए अपने बढ़ते वन क्षेत्र का जश्न मनाता
Read Moreआज जब हम विश्व पृथ्वी दिवस मना रहे हैं, तो यह केवल कैलेंडर की एक तारीख़ नहीं, बल्कि मानवता के
Read Moreआज का युग विज्ञान और विकास का युग है, परंतु इस विकास की दौड़ में प्रकृति का संतुलन तेजी से
Read Moreवर्तमान समय में ऊर्जा संकट, बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण और पर्यावरण प्रदूषण मानव सभ्यता के सामने गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहे
Read Moreदेश में पहली बार होगी झरनों की गिनती की खबर सुर्खियों में आई थी ।जल स्त्रोतों की गणना में झरनों
Read More“जल उठा तालाब” सुनते ही मन में अग्नि की छवि उभरती है, परन्तु यहाँ आग की लपटें दिखाई नहीं देतीं
Read Moreवैश्विक स्तर पर आज हर देश पर्यावरण समस्याओं का सामना कर रहा है जिसका समाधान खोजने उसपर अमल करने के
Read Moreपर्यावरण के हित में कई संस्थाएं कार्य कर रही है। कई संस्थाए वृक्षारोपण का पुनीत कार्य करती है। उन्हें बीमार
Read Moreमार्च के अंतिम दिनों में जब मुझे साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित साहित्यिक पत्र–पत्रिकाओं के सम्मेलन में भाग लेने
Read Moreमप्र में कही- कही मैना पक्षी दिखाई देता है।छत्तीसगढ़ में मैना को प्रमुख दर्जा दिया जाकर मैना को विशिष्ट सम्मान
Read More