Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

राजनीति

केन की धारा में बहता एक सवाल : क्या इंसान भी विकास का हिस्सा है?

विकास तभी सार्थक है, जब उसकी कीमत किसी की पहचान, आजीविका और अस्तित्व न बने। आज भारत इसी प्रश्न के

Read More
सामाजिक

फ्लैश फ्लड से पहले फ्लैशबैक – एक गलती, पूरी कहानी खत्म

प्रकृति जब रौद्र रूप धारण करती है, तब मनुष्य की सारी शक्ति क्षणभर में प्रभावहीन हो जाती है। मानसून इसका

Read More
राजनीति

सम्मान नहीं, रणनीतिक विश्वास की मुहर है ‘बिंतांग आदिपूर्णा’

कूटनीति की असली ताकत हाथ मिलाने, औपचारिक स्वागत या साझा तस्वीरों में नहीं, बल्कि उस विश्वास में दिखाई देती है,

Read More
पर्यावरण

गर्म होती पृथ्वी, ठंडी पड़ती समझ : भारत का जलवायु सच

भारतीय सभ्यता सदियों तक ऋतुओं पर उतना ही भरोसा करती रही, जितना सूर्योदय पर। खेती, नदियाँ, पर्व-त्योहार और जीवन मौसम

Read More
राजनीति

सीमा पर अविश्वास, बाज़ार में विश्वास : कितना उचित?

इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं, बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है।

Read More
राजनीति

स्मार्ट नहीं, समावेशी शहर : सूरत का स्लम-फ्री सफर राष्ट्रीय प्रेरणा बने

जब किसी शहर की चमक झुग्गियों के अँधेरे को ढकने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि विकास की तस्वीर अभी

Read More
राजनीति

नई संवैधानिक सर्जरी: सत्ता से अपराध की सीधी विदाई

भारतीय राजनीति की सबसे ऊंची कुर्सियों के लिए अब केवल जनादेश पर्याप्त नहीं रहेगा, बल्कि कानून की कसौटी पर खरा

Read More