Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य लेख – आजादी मिली थी, गुलामी हमने खुद चुन ली

कमाल की आज़ादी है हमारी! अंग्रेज़ों को भगाने के बाद हमने गुलामी के इतने नए दरवाज़े खोल लिए कि अब

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पर्यावरण

इलाज के बाद बची बीमारी : अस्पतालों के नीचे दफन होता भविष्य

कूड़े का कोई टुकड़ा सिर्फ कूड़ा नहीं, खासकर जब वह अस्पताल से निकला हो। उसे जमीन में दबाने से खतरा

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राजनीति

मक्का का त्रिकोण : अलग हित, फिर साथ आने की जरूरत क्यों पड़ी?

मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान का रक्षा समझौता पश्चिम एशिया के बदलते सुरक्षा-समीकरण का संकेत है। 7 अगस्त

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स्वास्थ्य

दवाएँ बनीं जीवन की उम्मीद, लेकिन कीमतें बनीं सबसे बड़ी दीवार

समय ने ऐसी करवट ली है कि अब सबसे बड़ा डर बीमारी नहीं, बल्कि उसके उपचार का भारी बोझ बन

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राजनीति

यात्री कतारों में खड़े रहे, सुरक्षा के रखवाले सौदों में खड़े मिले

सुरक्षा का तमाशा अजीब है—कटघरे में यात्री खड़ा होता है, चूक भीतर होती है। वह चुपचाप बैग खोलता है, जूते-बेल्ट

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सामाजिक

एक ऐसी दुनिया जहाँ सब उपलब्ध हैं, पर कोई उपस्थित नहीं

सभ्यता का सबसे गहरा घाव किसी युद्ध, महामारी या आर्थिक संकट ने नहीं, उस चमकती स्क्रीन ने दिया है जिसे

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