पीड़ा की धरती पर आशा का वृक्ष : बाबा आमटे
कुछ लोग जन्म लेकर नहीं, बल्कि अपने कर्मों से अमर बनते हैं। वे समय की सीमाओं को लांघकर समाज की
Read Moreकुछ लोग जन्म लेकर नहीं, बल्कि अपने कर्मों से अमर बनते हैं। वे समय की सीमाओं को लांघकर समाज की
Read More5 फरवरी 2026 को राज्यसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया, तो सदन में अचानक
Read Moreजब एशिया की जियोपॉलिटिक्स अनिश्चितता और प्रतिस्पर्धा की तेज लहरों से घिरी हुई है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 7-8 फरवरी 2026 का
Read More68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स की रात कला, संगीत और मानवीय मूल्यों के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो
Read Moreतूफानों से भागने वाले समय की धूल में खो जाते हैं, लेकिन जो तूफान को साध लेते हैं वही युग गढ़ते
Read Moreविश्व राजनीति के बदलते परिदृश्य में ऊर्जा अब केवल ईंधन नहीं, बल्कि शक्ति, प्रभाव और रणनीति का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी
Read Moreघड़ी में अभी पाँच बजने में कुछ ही मिनट बाकी थे। वह खामोश, धोखेबाज़ वक्त—रात और सुबह के बीच का—जब शरीर
Read Moreजब सत्ता के गलियारों में कानून की दस्तक पड़ती है, तब केवल फाइलें नहीं हिलतीं, पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की परीक्षा शुरू हो
Read Moreजब कोई भाषा युगों की चेतना को समेटे हुए भविष्य की तकनीक से संवाद करने लगे, तब वह केवल संप्रेषण का
Read Moreहर घंटे 51 महिलाएँ हिंसा का शिकार होती हैं। यह वाक्य किसी रिपोर्ट की पंक्ति भर नहीं, बल्कि समकालीन समाज के अंतर्मन से
Read More