मैं अब नहीं लड़ता… क्योंकि मैंने खुद को खोकर जीतना छोड़ दिया है
जब जीवन बहुत कुछ सिखा देता है, तब इंसान हर आवाज़ का जवाब देना और हर लड़ाई लड़ना छोड़ देता
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Read Moreकुछ फैसले दिमाग में नहीं, मनुष्यता की भीगी तहों में जन्म लेते हैं। वे तर्क से नहीं, अनदेखे दर्द की
Read Moreराजनीतिक विरासत उपाधियों या पारिवारिक पहचान से नहीं, जनविश्वास, वैचारिक दृढ़ता और जनसंघर्ष से निर्मित होती है। कुछ व्यक्तित्व इतिहास
Read Moreलोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना गलती होना नहीं, बल्कि उसे उपलब्धि के प्रमाणपत्र से ढक देना है। जब सच कागजी
Read Moreशिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं, स्कूल में शिक्षक नहीं, सड़क पर रोशनी नहीं, कार्यालय में कर्मचारी नहीं।
Read Moreउत्सव कभी केवल मनुष्य के आयोजन नहीं थे; वे प्रकृति के साथ हमारी मौन आत्मीयता के प्रतीक थे। हमारी सांस्कृतिक
Read More2047 में जब भारत अपनी आज़ादी का शताब्दी वर्ष मनाएगा, तब दुनिया केवल हमारी अर्थव्यवस्था का आकार नहीं, बल्कि यह
Read Moreइतिहास की सबसे बड़ी शक्ति यह नहीं कि वह अतीत में दर्ज है, बल्कि यह कि वह हर युग में
Read Moreभारत का जल संकट नदियों में घटते प्रवाह से अधिक, हमारी नीतियों में घटती दूरदृष्टि का संकट है। विडंबना यह
Read Moreहर युग अपने प्रतीक स्वयं गढ़ता है। कभी कोई शब्द अपमान का पर्याय होता है और कभी वही शब्द परिवर्तन
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