मातृभाषा माध्यम में उच्च शिक्षा विकास को दे सकती है रफ्तार
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, वह चिंतन की धुरी है। जिस भाषा में मनुष्य सपने देखता है, तर्क
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Read Moreआईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत ने देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की चमकदार इमारतों के पीछे
Read Moreएक समय था जब अपना नाम लिख लेना ही साक्षरता मानी जाती थी। फिर कंप्यूटर चलाना सीखना साक्षरता बन गया।
Read Moreभारत के सर्वोच्च और सर्वाधिक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गिने जाने वाले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई में 18 सितंबर 2026
Read Moreभारत में स्कूली शिक्षा की बहस लंबे समय तक विद्यालयों की संख्या, नामांकन और बुनियादी सुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही।
Read Moreहर युग अपनी पहचान अपने निर्माणों से छोड़ता है; लेकिन आने वाला समय यह पूछेगा कि इन निर्माणों ने इंसान
Read Moreडॉ. सत्यवान सौरभ समकालीन हिंदी पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में सक्रिय एक स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार, कवि, साहित्यकार एवं
Read Moreभारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। लेकिन मुझे अफ़सोस है कि मैं इसे नहीं मना सकता।
Read Moreशिक्षक सिर्फ किताबी ज्ञान न देकर अपने छात्रों को जीवन जीने की कला को सीखता है। उनके चरित्र का निर्माण
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