भूल हुई तो मान लो
भूल हुई तो मान लो, मत करना इनकार।
सुधर गया जो वक्त पर, उसका जीवन सार॥
गलती से जो सीख ले, वही है समझदार।
ठोकर बनती राह की, मंजिल का आधार॥
अपनी भूलें देखकर, मन में करो विचार।
कल से बेहतर आज हो, यही सच्चा सुधार॥
कल जो मुझसे हो गया, उसका है अफसोस।
आज सुधारूँ स्वयं को, रखकर पूरा होश॥
शब्दों से जो चोट दी, उसका मानो खेद।
मीठे बोलों से भरें, मन के सारे भेद॥
समय गया जो हाथ से, लौटे नहीं हजार।
अब हर पल को साधिए, यही सही उपचार॥
क्रोध किया जो बात पर, पछताया दिन-रात।
संयम रखकर बोलना, जीवन की सौगात॥
अपनों को जो दुख दिया, मन में रहा मलाल।
प्रेम भरे व्यवहार से, फिर कर लें खुशहाल॥
भूलों की गठरी लिए, कब तक चलना साथ।
सीख बनाकर छोड़िए, बीती सारी बात॥
कल की भूलें राह हैं, आज नया आधार।
सीख उन्हें जो ले सके, वही करे सुधार॥
छोटी-छोटी भूल से, मिलती हमको सीख।
जीवन की हर ठोकरें, देती नव तरकीब॥
सच को स्वीकारो सदा, चाहे लगे कठोर।
झूठ छिपाए भूल को, सच खोले हर छोर॥
माफी माँगने में कभी, छोटा होता कौन।
झुकने वाला ही सदा, रिश्तें समझे मौन॥
भूल सुधारूँ आज से, मन में लेकर ठान।
अपने कर्मों से बनूँ, खुद अपनी पहचान॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
