पहला गीत
पहला गीत लिखूँ तो कैसे, यही सोचकर रात कट गई।
भोर हुई, पंछी जागे, फिर नींद खुली और बात हट गई॥
विरह गीत लिख दूँ मैं तो क्या,
मिलन गीत फिर लिख पाऊँगा?
प्रेम, विरह, वेदना लिए क्या,
महफ़िल-महफ़िल टिक पाऊँगा?
वाणी ने संयम पाया तो, भूली-बिसरी बात रट गई।
पहला गीत लिखूँ तो कैसे, यही सोचकर रात कट गई॥
जब अपने षड्यंत्र करें तो,
गैरों की क्या बात करें हम?
खुद की मुश्किल सरल हुई न,
औरों की क्या बात करें हम?
नयन-नीर हम रोक न पाए, रोते-रोते आँख थक गई।
पहला गीत लिखूँ तो कैसे, यही सोचकर रात कट गई॥
— विशेष सिन्हा “विशेष”
