अधूरा आसमान
शहर की सबसे व्यस्त चौराहे के सिग्नल पर बारह साल के राजू के हाथ में कोई खिलौना नहीं, बल्कि एक
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Read Moreशहर के शोर से दूर उस पुरानी हवेली की दीवारों पर जमी काई अब सिसकियाँ लेती थी। वह हवेली, जिसे
Read Moreखंडवा कॉलेज की सर्द शामों की यादेंखंडवा के उस पुराने कॉलेज परिसर की सर्द शामें आज भी मेरे दिमाग़ के
Read Moreहवेली के उस पुराने मेहराबदार दालान में वक्त जैसे थम सा गया था। बाहर पेड़ों की घनी छांव से छनकर
Read Moreज़ोया और राकेश की मुहब्बत के किस्से कभी स्कूल की तंग गलियों और कॉलेज के उन नीम के पेड़ों के
Read Moreउससे मेरी मुलाक़ात कोई बहुत पुरानी न थी, और न ही उसे मुकम्मल तौर पर ‘नई’ कहा जा सकता था।
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