दोस्तों के बीच दबी ज़ुबान में उनके इश्क़ की चर्चाएं आम थीं
सालों बीत गए। शहर के उस मशहूर बीएड कॉलेज की वो चहल-पहल, वो नई उम्र, नए अहसास और आंखों में
Read Moreसालों बीत गए। शहर के उस मशहूर बीएड कॉलेज की वो चहल-पहल, वो नई उम्र, नए अहसास और आंखों में
Read Moreदूर-दूर तक जंगलों, पहाड़ों चट्टानो के बीच एक छोटा सा घर, जिसमें सिर्फ तीन लोगों का बसेरा था, लेकिन सपनों
Read Moreयह कहानी किसी एक शख़्स की नहीं, बल्कि हर उस दिल की है जिसने मोहब्बत में सिर्फ़ पाना नहीं, बल्कि
Read Moreवालिद साहब (पिताजी) के इंतक़ाल को अभी चंद ही महीने हुए थे कि घर की फज़ा (माहौल) बिल्कुल बदल गई।
Read Moreसुबह के क़रीबन नौ सवा नौ का ही समय होगा । दिल्ली मेट्रो हर रोज़ की तरह खचाखच भरी हुई
Read Moreसर्दियों का आग़ाज़ हो चुका था। क़श्मीर की हसीन वादी पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर बिछने को बेताब थी। ‘श्रीनगर’
Read Moreमेरी डायरी के ये धूल-धूसरित, उदास पन्ने और उनकी हर पंक्ति में सांस लेती तुम्हारी स्मृतियां…आज फिर मैंने इन्हें पलटा,
Read Moreमैं अपने बरामदे में बैठा पहाड़ों की खूबसूरती को देख रहा था । इस बार कई सालों के बाद मैं
Read Moreशाम ढल रही थी, और रेलवे स्टेशन के पुराने पीपल के पेड़ पर परिंदों का शोर धीरे-धीरे थम रहा था।
Read Moreचंबल की सुलगती फ़िज़ाओं में सिर्फ़ बारूद की तीखी गंध और ख़ून के कतरे ही नहीं तैरते थे, बल्कि एक
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