सत्ता पक्ष की ख़ामोशी और विपक्ष की विवशता के बीच रामलीला मैदान की गूंज
दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान महज़ ईंट-पत्थरों और रेती का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र का वह
Read Moreदिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान महज़ ईंट-पत्थरों और रेती का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र का वह
Read Moreशाम का वक्त था। बाहर हल्की-हल्की फुहार पड़ रही थी और लिविंग रूम में दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक
Read Moreवक्त की धूप-छांव और पगडंडियों से गुजरते हुए ज़िंदगी कब एक ऐसे मोड़ पर आ पहुँचती है, जहाँ सिवाय अहसासों
Read Moreदिल्ली का रामलीला मैदान भारतीय राजनीतिक इतिहास का वह मूक साक्षी रहा है, जिसने सत्ता के अहंकार को भी कई
Read More(“औलाद दरख़्त की तरह होती है… माँ-बाप उसे अपने खून-ए-जिगर से सींचते हैं, उसे जवान करते हैं, उस पर फ़ूल
Read Moreकैसे हो तुम? उम्मीद है तुम्हारी दुनिया अब भी उसी मद्धम सी रोशनी और सुकून भरी ख़ामोशी में बसती होगी,
Read Moreवर्तमान समय में यदि देश की राजनीतिक परिस्थितियों का सूक्ष्म अवलोकन किया जाए, तो एक गहरी बेचैनी और दिशाहीनता का
Read Moreमाँ-बाप और औलाद का रिश्ता इस कायनात का सबसे पवित्र, अनमोल और निःस्वार्थ बंधन है। इस रिश्ते की नींव केवल
Read Moreमहानगर के उस सबसे व्यस्त चौराहे पर, जहाँ ज़िंदगी रोबोटिक रफ़्तार से दौड़ती है, लाल बत्ती की हर एक चीख़
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