Author: डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

सामाजिक

विकसित भारत के निर्माण में हमारी भूमिका

किसी भी राष्ट्र की नियति केवल उसकी सीमाओं या सरकारी नीतियों से तय नहीं होती, बल्कि उसके नागरिकों के सामूहिक

Read More
संस्मरण

यादों के वो पन्ने, नीले काग़ज़ में सिमटी मुकम्मल दुनिया

आज के डिजिट्ल युग में, जहाँ संदेश उंगलियों की एक ‘टैप’ पर पहुँच जाते हैं, बीते दौर के वो नीले

Read More
भाषा-साहित्य

साहित्य की साधना में ‘स्व’ से ‘सर्व’ की ओर

​साहित्य केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज की चेतना का जीवंत दस्तावेज़ होता है। वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति

Read More