ग्रामीण शाम के दृश्य पर एक कविता
ढलती शाम का सफ़रसांझ ढली है, सूरज लाल,पेड़ों के पीछे छुपा गुलाल।कच्ची सड़क पर उड़ती धूल,घर लौट रहे हैं सब
Read Moreढलती शाम का सफ़रसांझ ढली है, सूरज लाल,पेड़ों के पीछे छुपा गुलाल।कच्ची सड़क पर उड़ती धूल,घर लौट रहे हैं सब
Read Moreयह सवाल किसी भी संजीदा और संवेदनशील क़लमकार के आत्म-मंथन का सबसे बुनियादी और गहरा बिंदु है कि हम आख़िर
Read Moreसंसार में यदि आपको अपनी एक अमिट, विशिष्ट और सम्मानित पहचान स्थापित करनी है, तो आपको दूसरों के प्रभाव, रसूख
Read Moreशाम के साए ज़रा गहरे हो चुके थे। रेलवे स्टेशन के मुसाफ़िरख़ाने में बत्तियों की मद्धम रोशनी फैली हुई थी।
Read Moreसृष्टि के आदि से प्रवाहित, देवभूमि की अमर कहानी है,शिव के आदियोग से उपजी, यह पावन ज्ञान-त्रिवेणी है। सिंधु घाटी
Read Moreआदि योगी भगवान शिव से जनमी, पावन योग-परंपरा है,सिंधु घाटी की मुहरों में, अंकित जिसका अमिट विग्रह है। ऋग्वेद और
Read Moreइंसानी समाज का यह एक बड़ा अलमिया है, ट्रैजिडी है कि हर इंसान में दूसरों से मिलने वाली बेपनाह मोहब्बत
Read Moreसालों बीत गए। शहर के उस मशहूर बीएड कॉलेज की वो चहल-पहल, वो नई उम्र, नए अहसास और आंखों में
Read More‘डाक्टर’ का सफ़र और उसका महत्व। आधुनिक समाज में ‘डाक्टर’ एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही हमारे मन में
Read Moreयह कहानी किसी एक शख़्स की नहीं, बल्कि हर उस दिल की है जिसने मोहब्बत में सिर्फ़ पाना नहीं, बल्कि
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