Author: डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

कविता

राष्ट्रीय गीत, आज़ादी का जश्न

तिरंगा लहराया है, गगन ने सर झुकाया है,आज़ादी का जश्न, हिंदुस्तान मुस्कुराया है। मंगल पांडे कीललकार,भगत सिंह की रफ़्तार,बापू की

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गीत/नवगीत

राष्ट्रीय गीत : आज़ादी का जश्न

तिरंगा लहराया है, गगन ने सर झुकाया है,आज़ादी का जश्न, हिंदुस्तान मुस्कुराया है।मंगल पांडे की ललकार,भगत सिंह की रफ़्तार,बापू की

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कविता

दिल की धड़कन,जान,हमारी शान तिरंगा है

भारतवासी गर्व से बोले,हमारी शान तिरंगा है!अंबर पर लहराता जाए, भारत की पहचानकेसरिया बलिदान बताए, श्वेत शांति का पाठ,हरा रंग

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राजनीति

आज़ादी के अमृतकाल में,संकल्प, साधना और राष्ट्र निर्माण का पर्व

स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व या कैलेंडर का पन्ना मात्र नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत अमर सेनानियों के

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भाषा-साहित्य

लेखक का दर्द, उनकी संवेदना : एक मर्मस्पर्शी विश्लेषण

एक पिता को मिला तिरस्कार वीडियो काल पर..अंतिम विदाई..आज कलम भी बदहवास है,कलम की स्याही भी उदास है!ता उम्र सदैव

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

नागपंचमी, ​विष से अमृत तक

हमारी प्राचीन परंपराएं मात्र रीति-रिवाजों या कर्मकांडों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि वे अस्तित्व के विज्ञान और ब्रह्मांडीय संतुलन के

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गीत/नवगीत

राष्ट्रीय गीत, संकल्प, साधना और राष्ट्र-निर्माण

​अमृतकाल का पावन पर्व, गूंजे भारत का जयगान।त्याग, तपस्या, बलिदानों से, महका अपना हिन्दुस्तान॥संकल्पों की नई डगर पर, बढ़ता जाए

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