धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वर्णाश्रम एवं चातुर्वर्ण्य

वैदिक परम्परा में वर्णाश्रम धर्म एवं चार वर्णों को आधार माना जाता है । परन्तु वर्तमान में इसका जो रूप हमें दिखायी देता है, वह शास्त्रों की परिभाषा के विपरीत है । वर्णाश्रम व्यवस्था एवं चातुर्वर्ण्य व्यवस्था सदैव ही समाज में रही है और रहेगी । अगर हम कहें कि वैश्‍विक किरणें ( cosmic rays) […]

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जयंतिया समुदाय का जन – जीवन

जयंतिया हिल्स का भौगोलिक स्वरूप पर्वतराज हिमालय से जुड़ा हुआ है। राजनीतिक रूप से यह मेघालय राज्य का एक जिला है जो जुलाई 2012 से ईस्ट जयंतिया हिल्स और वेस्ट जयंतिया हिल्स नामक दो जिलों से नामित है। प्राकृतिक रूप से यह उपोष्णकटिबंधीय वनों से आच्छादित है। मेगालिथिक (मोनोलिथ) पत्थरों का संग्रह अतीतकालीन समन्वय का […]

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उपासना

ओ३म् भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रपश्येमाक्षभिर्यजत्राः। स्थिरैरंगैस्तुष्टुवाँ सस्तनुभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः॥ यजु० २५।२१ स्तुति किसकी करनी चाहिए और क्यों करनी चाहिए, यह प्रश्न आज साधारण जनता के मस्तिष्क में उत्पन्न होता है। केवल इतना ही नहीं इसके साथ अन्य अनेक प्रश्न भी वे करते हैं । किन्तु प्राचीन काल के पुरुष यह शंका नहीं किया करते […]

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मकरसंक्रांति

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है. यह हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है| उत्तर भारत में यह पर्व मकर संक्रांति के नाम से और गुजरात में उत्तरायण केरल में पोंगल के नाम से मनाया जाता है| मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हरिद्वार काशी आदि […]

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लोहड़ी

जनवरी के पहले दूसरे सप्ताह में लोहड़ी पूरे देश में मनाई जाती है | लोहड़ी को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है लोहड़ी एक फसल का त्यौहार है| जो सर्दियों के खत्म होने का संकेत देता है जब पंजाब में रबी की फसल की कटाई होती है| तब लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है […]

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गुरु दक्षिणा में अंगूठे का सच

हमारे देश ही नहीं अपितु समस्त विश्व में गुरु-शिष्य परम्परा किसी न किसी रूप में आदि काल से सर्वदा विद्यमान है। गुरु से सदैव सर्वगुण संपन्न होने की अपेक्षा की जाती है। संत कबीर ने शिष्य को मिट्टी का कच्चा घड़ा तथा गुरु को कुम्भकार बताया। इतना ही नहीं, गुरु को ब्रह्मा, विष्णु व महेश […]

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मनुर्भव (मनुष्य बनो)

वेद कहता है कि तू मनुष्य बन। जब कोई जैसा बन जाता है तो वैसा ही दूसरे को बना सकता है। जलता हुआ दीपक ही बुझे हुए दीपक को जला सकता है। बुझा हुआ दीपक भला बुझे हुए दीपक को क्या जलाएगा? मनुष्य का कर्त्तव्य है कि स्वयं मनुष्य बने और दूसरों को मनुष्यत्व की […]

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पुनर्जन्म का सच क्या अधूरी कामना है

विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद से लेकर वेद, दर्शनशास्त्र, पुराण, गीता, योग आदि ग्रंथों में पुनर्जन्म की मान्यता का प्रतिपादन किया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार शरीर का मृत्यु ही जीवन का अंत नहीं है। परंतु जन्म जन्मांतर की श्रृंखला है।  पुराण आदि में भी जन्म और पुनर्जन्मों का उल्लेख है।  जीवात्मा पुनर्जन्म लेती […]

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महापरिनिर्वाण पारलौकिक निःस्वार्थता

हम जो कुछ भी देखते या समझते हैं, वह एक सपने के भीतर सिर्फ एक सपना है।” ~ एडगर एलन पो । कर्म स्मृति का अवशिष्ट प्रभाव है। भौतिक दुनिया में आपका पुनर्जन्म आपके पिछले जीवन से आपकी स्मृति का अवशेष है, लेकिन एक बार जब वे एक नए जीवन में एक नया शरीर लेता […]

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जानिये ३३ करोड़ देवताओं और १०८ का रहस्य

हिन्दू धर्म में  मन्त्र, पाठ, यज्ञ में आहूति, या किसी भी अन्य प्रकार की  साधना अथवा सिद्दी आदि के लिए मन्त्र की पुनरावृति  १०८ बार कम से कम अवश्य की जाती है  ! या  आपने लिखा हुआ देखा होगा ॐ १०८ श्री गणेशाय नमः ! १०८ ही क्यों ?  आइये इसका रहस्य जानते हैं की […]