दोहा
मकरंद ******** फूलों के मकरंद से, बनता शहद मिठास। भंवरों को भी इसी से, होती ज्यादा आस।। बूँद-बूँद मकरंद में,
Read Moreजरुरत है आज संरक्षण कीहम सबके लिए ,पर्यावरण केसबको मिलकर अपने आप के लिए। बंद कीजिए अब पेड़ काटना प्रदूषण फैलाना,वरना कल मांगेंगे भीख हमअपने
Read Moreमाया में हर जन फँसा, बना हुआ है हीन।ठगनी उसको ठग रही, और संग में दीन।।और संग में दीन, कौन
Read Moreश्रम साधक का बहे पसीना।चाहे सुख से वो भी जीना।।करना चाहे सपने पूरे।जो भी अब तक रहे अधूरे।। श्रम साधक
Read Moreलोभ मोह में उलझा मानव, बनी हुई है पीर।कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।। इस दुनिया की गजब कहानी,
Read Moreआप सभी को बधाइयाँ शुभकामनाएँ हैं क्योंकि आज गंगा दशहरा है इस दिवस की भी औपचारिकता निभाइए।और कुछ तो आप कर नहीं
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