राजनीति

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लोकतंत्र ‘कुर्सी की सुरक्षा’ में नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति की मुस्कान में निहित है

देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर नज़र डालें तो एक बेहद विडंबनापूर्ण और चिंताजनक तस्वीर उभरती है। संसद से लेकर

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