जंतर-मंतर से उठते लोकतांत्रिक प्रश्न
लोकतंत्र की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि नागरिक हर पाँच वर्ष में मतदान करते हैं। उसकी वास्तविक
Read Moreलोकतंत्र की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि नागरिक हर पाँच वर्ष में मतदान करते हैं। उसकी वास्तविक
Read Moreमनुष्य का वास्तविक संघर्ष बाहरी संसार से कम और अपने अंतर्मन से अधिक होता है। सभ्यताओं का इतिहास इस सत्य
Read Moreभ्रष्टाचार पर चर्चा प्रायः किसी घोटाले, आरोप या राजनीतिक विवाद के समय तेज़ हो जाती है, किंतु सुशासन का वास्तविक
Read Moreलोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में न्यायपालिका केवल एक संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों, विधि के शासन और राज्य की
Read Moreसमकालीन विश्व व्यवस्था में सैन्य शक्ति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी किसी राष्ट्र की सामरिक क्षमता का
Read Moreभूमि भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि व्यवस्था और सामाजिक संरचना का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। ग्रामीण भारत में किसी परिवार की
Read Moreभारतीय लोकतंत्र की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसकी संस्थागत विश्वसनीयता है। संविधान ने शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभ—विधायिका,
Read Moreशिक्षा बोली — मैं चरित्र हूँ, विवेक हूँ, प्रकाश हूँ,परीक्षा बोली — मैं अंक हूँ, रैंक हूँ, विशेष अधिकार हूँ।
Read Moreवर्तमान युग को यदि डिजिटल युग कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जिस प्रकार औद्योगिक क्रांति ने विश्व
Read Moreस्मृतियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं होतीं, वे वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा पहचानने का माध्यम भी बनती
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