महाभियोग व्यवस्था का संवैधानिक पुनर्विचार
भारतीय लोकतंत्र की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसकी संस्थागत विश्वसनीयता है। संविधान ने शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभ—विधायिका,
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Read Moreशिक्षा बोली — मैं चरित्र हूँ, विवेक हूँ, प्रकाश हूँ,परीक्षा बोली — मैं अंक हूँ, रैंक हूँ, विशेष अधिकार हूँ।
Read Moreवर्तमान युग को यदि डिजिटल युग कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जिस प्रकार औद्योगिक क्रांति ने विश्व
Read Moreस्मृतियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं होतीं, वे वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा पहचानने का माध्यम भी बनती
Read More21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज केवल भारत का सांस्कृतिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि
Read Moreचुनाव का मौसम आया, गलियों में शोर उठा,हर दीवार पर चेहरा नया, हर वादा फिर से सजा।भाषणों की बारिश में,
Read Moreभारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि उसने राज्य की शक्ति को केवल शासन चलाने
Read Moreमिट्टी सब याद रखती है, हर कदम का हिसाब रखती है,पसीने की हर बूंद को, अपने आँचल में सहेजती है,खामोशी
Read Moreवोटों की खेती में, वादों का पानी डाला जाता है,हर मौसम में सच का बीज, चुपचाप जला दिया जाता है।चुनाव
Read Moreभारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अनेक ऐसे क्षण आए हैं जब व्यवस्था के हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ ने
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