अहंकार
अहंकार करें तो करें किस बात का
अपने रूप अपने सौन्दर्य
अपने रुतबे या अपने धन का
अंत में तो हम सब
राख और मिट्टी ही तो हैं
जो बहा दी जायेगी
गंगा या किसी और पावन नदी में
इस तरह विलीन हो जायेगा
हमारा अस्तित्व
अहंकार करें तो करें किस बात का
अपने रूप अपने सौन्दर्य
अपने रुतबे या अपने धन का
अंत में तो हम सब
राख और मिट्टी ही तो हैं
जो बहा दी जायेगी
गंगा या किसी और पावन नदी में
इस तरह विलीन हो जायेगा
हमारा अस्तित्व