धूप छांव
सूरज को रास्ता नहीं मिल रहा मेरे घर का चारों ओर से घिर गया मेरा घर ऊँची ऊँची ईमारतों से
Read Moreनारी की पीड़ा सबको दिखे पुरुष की न देखे कोय क्या क्या न वो सहता रखने को घर की लाज
Read Moreजिसे देखो वो ही भाग रहा अपनों से जुदा हो रहा पर जा कहाँ रहा है उसको खुद पता नहीं
Read Moreशहर छोड़ लौट चलूं अब वापिस अपने गांव गांव छोड़ शहर आया था कुछ पाने और कमाने किया हिसाब तो
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