कविता
हम वृद्धों की है यही कहानीनज़र मैं बुढ़ापा दिल मैं जवानीबाल हो गए सफ़ेदकर के उनको कालेपिल पिले मुहँ में
Read Moreक्यों भाई तुम किस पक्ष से हो मैं दोनों ही पक्ष में हूँ अपनी सहूलियत के हिसाब से आता जाता
Read Moreआज का आदमीगुस्साया सा क्यों हैजिससे भी करो बातकुछ तन्नाया सा क्यों हैवार करता तरकश मेंरखे जिन शब्द बाणौ सेतपिश
Read Moreएतवार अब टूट रहा शादी के बंधन से सात की क्या कहें एक जन्म का बंधन ही भारी हो रहा
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