हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग्य

विकास की वातानुकूलित आत्महत्या

मनुष्य बड़ा बुद्धिमान प्राणी है। इतना बुद्धिमान कि उसने अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए ऐसी-ऐसी चीज़ें बना डालीं,

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हास्य व्यंग्य

हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र

मैं बचपन से ही राष्ट्रसेवा करना चाहता था। जब दूसरे बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने का सपना देखते थे,

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हास्य व्यंग्य

विचार-विक्रय, वफ़ादारी-विसर्जन और सत्ता-सुगंध का बंगाली संग्राम

पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों किसी विचारधारा का अखाड़ा कम और “राजनीतिक रियलिटी शो” ज्यादा लगने लगी है। फर्क

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हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य – प्रेमिका के खास सपने

आजकल की प्रेमिकायें प्रेमी को हड़काती हैं। प्रेमी के अंदर वीभत्स रस की उत्पत्ति होने लगती है। बहुत भयंकर डर

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