व्यंग्य – कबीरा खड़ा हाईवे पर
जैसे ही मैंने सुना कि बनारस हाईवे पर कबीरदास खड़े होकर दोहे सुना रहे है मैं चौका और तुरंत उस
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Read Moreचुनाव में हार-जीत तो लगी रहती है, लेकिन जब जीत का घोड़ा दौड़ते-दौड़ते अचानक ठोकर खा जाए तो सवार को
Read Moreभ्रष्टाचार की भी अपनी एक व्यवस्था है। यहाँ ईमानदारी पद देखकर नहीं, पद की ऊँचाई देखकर शर्माती है। सिपाही, क्लर्क
Read Moreएक समय था, जब करवा चौथ पर पत्नियाँ सुबह से ही पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती
Read Moreराजनीति भी बड़ी कमाल की चीज है। नेताओं के मुँह से कोई शब्द निकल जाए, तो राष्ट्रीय बहस छिड़ जाती
Read Moreशरद पूर्णिमा की रात है। चाँद अपनी सोलह कलाओं के साथ आसमान में विराजमान है। धरती पर अमृत बरसने की
Read Moreशीर्षक को पढ़कर हँसी आ रही होगी न आपको ? सही-सही बताना आ रही है ना? क्या आपको वाकई में
Read Moreविजयादशमी की बधाई देने मित्र यमराज मेरे महल में पधारे। बधाई तो नहीं दी, सवाल जरूर पूछ लिया
Read Moreकाश मैं एक संपादक होता! तब साहित्य की दुनिया में मेरा भी जलवा होता। लेखक महीनों मेहनत करके रचना लिखते,
Read Moreउस प्रभु से, ईश्वर से, नारायण से, परमात्मा से, खुदा से, वाहे गुरु से, मालिक से, सर्वे सर्वा से कभी
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