हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग्य

मौसम की चाल में टूटे हुए सपनों की आवाज़ कोई नहीं सुनता

बेरहम गर्मी झेलने के बाद और कितनी मिन्नतों के बाद हमारी मनोकामना पूर्ण हुई और अब कहना पड़ रहा है

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