Author: *डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

गीत/नवगीत

छरर -छरर छर बरसें

छरर-छरर छरछर-छर बरसेंआसमान से बूँदें। फैला अपनेहाथ हथेलीभर-भर अँजुरी पीतेजेठ मास केप्यासे मानवथे मुरझाए जीतेगिरतीं बूँदेंजब पलकों परनयन सभी हम

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