व्यंग्य – देवासुर संग्राम
इस देश में कोई कितना ही बड़ा आतताई हो,मानवता का नृशंस हत्यारा हो,मानव देह में साक्षात राक्षस ही क्यों न
Read Moreइस देश में कोई कितना ही बड़ा आतताई हो,मानवता का नृशंस हत्यारा हो,मानव देह में साक्षात राक्षस ही क्यों न
Read Moreपों – पों पीं – पीं करती लारी।ट्रक कारों के वाहन भारी।। नहीं चैन से रहने देते।कान फोड़ते वाहन जेते।।शोर
Read Moreछरर-छरर छरछर-छर बरसेंआसमान से बूँदें। फैला अपनेहाथ हथेलीभर-भर अँजुरी पीतेजेठ मास केप्यासे मानवथे मुरझाए जीतेगिरतीं बूँदेंजब पलकों परनयन सभी हम
Read Moreदेख तरक्की देश की, फन फैलाए व्याल।अवसर देखें छद्म से, बने हुए हैं काल।। कुटिल दृष्टि है गीध की, कॉकरोच
Read Moreनहीं दाल में कालासारी दाल हो गई काली। राम दान केसभी लुटेरेपहने पीत चदरियातिलक लगाए रामचन्द्र काबसते औध नगरियाराम पाँव
Read Moreधूम रसायन से भर डाला।नील गगन काला कर काला।। औंधा है ज्यों बड़ा कटोरा।नहीं समझना ओढ़ा बोरा।।सहज स्वच्छ हो गगन
Read Moreबहुत ही प्रसिद्ध कहावत है कि ऊँट की चोरी निहुरे- निहुरे नहीं होती।पर यहाँ तो हो गई।शायद चोरों को इस
Read Moreरावण की तुन्दी में गहरा बाण लगा है।कहता देश ठगों ने सारा देश ठगा है।। मंदिर में रहने वालों ने
Read Moreपानी से हैं प्राण हमारे।पानी से हम जीवन धारे।। पानी हमें बचाना अपना।जीवन है पानी बिन सपना।।मिले नहीं तो दीखें
Read Moreरात -रात भर परखा तेराभौं -भौं का भौकाल। बहुत गलत है कुत्सा कहनाकुत्ता भी अपमानवाक़्-सिद्धि पाई है तुमनेतुम मानव की
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