हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

नफरतों की आँधी से डराने की कोशिश ठीक नहीं है

काली आँधी मेंदीपक फिर भी जलताहौसला जागे नफरत के स्वरदीवारें ऊँची करतेमन रोता है सूखे पेड़ों परचिड़ियाँ लौट आतींआशा बचती

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हाइकु/सेदोका

वृक्ष पत्तियाँ बदलते हैं, जड़ें नहीं

ऋतु बदली हैपर जड़ों की नमीवैसी ही है पीले पत्तों मेंजीवन की थकानधीरे उतरी डाली ने फिरनव हरियाली कोगले लगाया

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हाइकु/सेदोका

सागर में उठने वाली हरेक लहरें तड़पाती हैं

नीले सागर मेंचुपचाप बहती हवामन भी भीगा लहरों की धुनपुरानी यादों जैसामधुर कंपन डूबता सूरजअधूरी बातों कासुनहरा रंग भीगी पलकों

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हाइकु/सेदोका

ऊँचाई पर बने रहने के लिए कुछ ख़ास

बादलों के पारचुपचाप चलता मनहवा भी धीमी पहाड़ों की गोदसपनों की सीढ़ियाँचढ़ती साँसें धूप का स्पर्शचट्टानों पर लिखेधैर्य के शब्द

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हाइकु/सेदोका

तजूर्बा बहुत कुछ देती है

धूप में तपकरसीखा है जीवनरास्ता अपना काँटों की चुभनमुस्कान सिखातीसहना हरदम गिरकर संभलनाहर हार के बादजीत का स्वाद वक़्त की

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हाइकु/सेदोका

सेदोका

हमें चाहिए एक ऐसा संसारहो आपस में प्यार।बनाना होगा हम सबको मिलकर ऐसा जग आधार।।१।। यमराज जी गले पड़े हमारे अब वही सहारे।पर बेचारे हमसे ही

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