आयकू
(वार्णिक छंद) (विधान -कुल चार पंक्तियाँ, क्रमशः १,२,३,४ वर्ण) बाहर भीषण गर्मी बचकर रहिए आप नहीं तो झुलस जाएंगे। युद्ध पड़ रहा विश्व पर भारीकुछ करें
Read Moreराहें थीं सीधीअचानक मुड़ गईंपवन के संग धूप के सायेचलते रहे कदमदिशा बदली सूखी सी मिट्टीअंकुर फिर भी फूटेआशा जगी
Read Moreशून्य की गोद मेंछिपा हुआ है जीवनएक अनकहा सत्य जहाँ कुछ भी नहींवहीं से सब कुछ जन्मेनए रूप लेते हैं
Read Moreबरसाती धाराकागज़ की छोटी नावसपने तैरें नन्हे से हाथपानी में छोड़तेखुशियाँ बहें मेघों की छाँवहँसी के संग बहतीनाव सुहानी गली
Read Moreधीमी सी लहरहौसलों का सफ़रचुप सा साहस टूटे किनारेफिर भी बढ़ती राहआशा का दीप अधूरी राहेंकोशिशों की जीतमन में उजाला
Read Moreवक्त सिखाएधीरे चलनाझुक कर जीनासच को चुनना घमंड टूटेक्षण में अक्सरसमय दिखाएअसली दर्पण नर्म हवा साजीवन बहताजो झुक जातावही रहता
Read Moreशब्द जब थक जाएँ,मन स्वयं से बातें करे,मौन धीरे उतर आए। भीड़ के शोर में जबअर्थ खोने लगें,मौन ही सहेज
Read Moreछोटा सा कदमबदल दे दिशा पूरीहिम्मत का दीप गिरते हैं कईफिर उठ खड़े होतेजीत की राह धूप में तपकरसोना सा
Read Moreआज की जरुरत हैसमझो जिम्मेदारी अबतुम्हारे लिए। कौन चाहता है समझनाक्या कैसा कर्तव्यतुम्हारे लिए। बूंद-बूंद से भरतासबका ही घड़ातुम्हारे लिए।
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