इरादों में कमी कैसे आई
धूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र
Read Moreधूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र
Read Moreओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती
Read Moreपुरानी राहें,धूप में सोई हुई,मन टटोलता। सूखे पत्तों में,बीते वर्षों की गूँज,धीरे बहती। खिड़की के पास,चाँदनी चुपके उतरे,स्मृतियाँ जागें। बरगद
Read Moreजीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन
Read Moreशरीर की भाषासांसों में उतरती शांतियोग का स्पर्श तन का हर तनावधीरे-धीरे मिट जाताआसन के संग मन की उलझनेंजैसे धुंध
Read Moreरोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के
Read Moreआज साइकिल दिवस हैं चलाएं हम आजतुम्हारे लिए। बिना तेल पेट्रोल केदौड़ाते सब साइकिल तुम्हारे लिए। स्वास्थ्य की संजीवनी है चलाते जो साइकिल तुम्हारे
Read Moreअचानकबढ़ गयासाइकिल का महत्वआज एक बार फिर।१ चलाएंहम सभीनियमित फिर साइकिलअर्थ, स्वास्थ्य के लिए।२ समस्यावैश्विक हैंपेट्रोलियम ईंधन कीसाइकिलें निकलने लगीं
Read Moreखामोश सड़कों परटूटे हुए सपनों की परछाइयाँधीरे-धीरे चलती हैं चाँद भी आज उदास हैरात की आँखों मेंएक अनकहा दर्द है
Read Moreरिश्तों की चुपचापएक मीठी सी हवादिल को छू जाती है बिना कहे भी सबबहुत कुछ कह जाते हैंअपनेपन के रंग
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