हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

इरादों में कमी कैसे आई

धूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र

Read More
हाइकु/सेदोका

प्रकृति की गोद में

ओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती

Read More
हाइकु/सेदोका

अतीत की यादें

पुरानी राहें,धूप में सोई हुई,मन टटोलता। सूखे पत्तों में,बीते वर्षों की गूँज,धीरे बहती। खिड़की के पास,चाँदनी चुपके उतरे,स्मृतियाँ जागें। बरगद

Read More
हाइकु/सेदोका

जाते ही श्मशान में मिट गई दूरियां

जीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन

Read More
हाइकु/सेदोका

रोने पर मरने वाले की बस तलाश में हैं हम

रोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के

Read More
हाइकु/सेदोका

विश्व साइकिल दिवस

आज साइकिल दिवस हैं चलाएं हम आजतुम्हारे लिए। बिना तेल पेट्रोल केदौड़ाते सब साइकिल तुम्हारे लिए। स्वास्थ्य की संजीवनी है चलाते जो साइकिल तुम्हारे

Read More
हाइकु/सेदोका

विश्व साइकिल दिवस

अचानकबढ़ गयासाइकिल का महत्वआज एक बार फिर।१ चलाएंहम सभीनियमित फिर साइकिलअर्थ, स्वास्थ्य के लिए।२ समस्यावैश्विक हैंपेट्रोलियम ईंधन कीसाइकिलें निकलने लगीं

Read More