रिश्तों की अहमियत पर गुफ्तगू ज़रूरी है
रिश्तों की डोर
मौन में भी बोलती है
दिल की भाषा में
एक मुस्कान से
टूटे पल जुड़ जाते हैं
नर्म एहसास में
समय की धारा
बहा ले जाए दूरी को
पर याद रहे वो
गुफ्तगू की धूप
ठंडे रिश्ते पिघलाए
स्नेह की आग में
शब्द अगर सच्चे
दिलों को पास लाते हैं
नए विश्वास में
चुप्पी भी भारी
कभी-कभी रिश्तों पर
दरार छोड़ जाए
समझ की बातें
रिश्तों को जीवित रखें
हर एक मोड़ पर
छोटा सा संवाद
बड़ा कर दे संसार को
अपनेपन से भर
— डॉ. अशोक
