मुक्तक/दोहा

गौसेवा

गौमाता का पा लिया, जिसने सच्चा प्यार।
रहे कृपा भगवान की, जीवन हो साकार॥

गौसेवा से मिल रहा, मन को सच्चा चैन।
दया, धर्म, सद्भाव से, महके जीवन-नैन॥

गौमाता की छाँव में, मिलता सुख अपार।
तन-मन दोनों हो उठें, निर्मल और उदार॥

गौवंशों से प्रेम है, खुशहाली का द्वार।
घर-आँगन में तब रहे, सुख-शांति लाभ अपार॥

जहाँ बसे गौमात हैं, बसे वहाँ भगवान।
सेवा से मिलता सदा, जीवन को सम्मान॥

गौमाता के चरण में, श्रद्धा जिसका वास।
उसके जीवन में सदा, रहता सुख-उल्लास॥

गौसेवा का पुण्य फल, मिलता बारंबार।
जीवन की हर राह पर, मिलता शुभ विस्तार॥

दूध, दही, घी दे रही, करती जग उपकार।
गौमाता के ऋण तले, झुकता यह संसार॥

गौमाता का मान ही, मानव का सम्मान।
दया, धर्म, सेवा बने, जीवन की पहचान॥

गौवंशों के रक्षक ही, कहलाते हैं वीर।
दया जहाँ पर बस गई, मिटती हर इक पीर॥

गौमाता का स्नेह है, जीवन का आधार।
इसके पावन प्रेम से, होता बेड़ा पार॥

सेवा से गौमात की, निर्मल हो मन-प्राण।
हर संकट का मिल सके, सौरभ सहज निदान॥

गौमाता की धूल भी, माने जग उपकार।
मान रखा जिसने यहाँ, उसका हुआ उद्धार॥

गौसेवा का भाव हो, निर्मल रहें विचार।
द्वेष मिटे, सद्भाव बढ़े, महके घर-संसार॥

गौमाता के नेह से, जीवन हो निष्काम।
सेवा का संदेश ही, सबसे सुंदर धाम॥

गौमाता के प्रेम में, छिपा सदा उपकार।
दया और ममता मिले, जीवन को आकार॥

गौमाता की वंदना, करती मन उजियार।
भक्ति, सेवा, प्रेम से, होता बेड़ा पार॥

गौसेवा से सीखिए, करुणा का व्यवहार।
यही मनुज का धर्म है, यही सच्चा सार॥

गौमाता का प्रेम ही, सबसे बड़ा प्रसाद।
जिसने पाया नेह यह, हुआ सदा आबाद॥

गौवंशों की कीजिए, तन-मन से रखवाल।
सेवा से महके सदा, जीवन की हर डाल॥

गौमाता की शरण में, मिलता सच्चा ज्ञान।
दया, धर्म, सद्भाव का, बढ़ता नित सम्मान॥

गौसेवा की भावना, रखिए सदा सँभाल।
मानवता के पथ सदा, बनती सुदृढ़ ढाल॥

गौमाता का नाम ले, मिटता मन का भार।
श्रद्धा से भर जाए तब, जीवन का विस्तार॥

गौसेवा के भाव से, खिलता हर विश्वास।
ईश्वर की कृपा बने, मिलता मधुर प्रकाश॥

गौ माँ के आशीष से, मिटते मन के शूल।
प्रेम, दया, सद्भाव के, खिलते सुंदर फूल॥

जिस आँगन में गौ बसे, रहता मंगल गान।
सुख-समृद्धि का हो सदा, वहाँ मधुर वरदान॥

गौमाता का मान कर, बढ़ता मानव धर्म।
सेवा से ही सार्थक हों, जीवन के सब कर्म॥

गौमाता का पा लिया, जिसने सच्चा प्यार।
रहे कृपा भगवान की, जीवन हो साकार॥

— डॉ. सत्यवान सौरभ

*डॉ. सत्यवान सौरभ

✍ सत्यवान सौरभ, जन्म वर्ष- 1989 सम्प्रति: वेटरनरी इंस्पेक्टर, हरियाणा सरकार ईमेल: satywanverma333@gmail.com सम्पर्क: परी वाटिका, कौशल्या भवन , बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045 मोबाइल :9466526148,01255281381 *अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों भाषाओँ में समान्तर लेखन....जन्म वर्ष- 1989 प्रकाशित पुस्तकें: यादें 2005 काव्य संग्रह ( मात्र 16 साल की उम्र में कक्षा 11th में पढ़ते हुए लिखा ), तितली है खामोश दोहा संग्रह प्रकाशनाधीन प्रकाशन- देश-विदेश की एक हज़ार से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशन ! प्रसारण: आकाशवाणी हिसार, रोहतक एवं कुरुक्षेत्र से , दूरदर्शन हिसार, चंडीगढ़ एवं जनता टीवी हरियाणा से समय-समय पर संपादन: प्रयास पाक्षिक सम्मान/ अवार्ड: 1 सर्वश्रेष्ठ निबंध लेखन पुरस्कार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी 2004 2 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड काव्य प्रतियोगिता प्रोत्साहन पुरस्कार 2005 3 अखिल भारतीय प्रजापति सभा पुरस्कार नागौर राजस्थान 2006 4 प्रेरणा पुरस्कार हिसार हरियाणा 2006 5 साहित्य साधक इलाहाबाद उत्तर प्रदेश 2007 6 राष्ट्र भाषा रत्न कप्तानगंज उत्तरप्रदेश 2008 7 अखिल भारतीय साहित्य परिषद पुरस्कार भिवानी हरियाणा 2015 8 आईपीएस मनुमुक्त मानव पुरस्कार 2019 9 इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ रिसर्च एंड रिव्यु में शोध आलेख प्रकाशित, डॉ कुसुम जैन ने सौरभ के लिखे ग्राम्य संस्कृति के आलेखों को बनाया आधार 2020 10 पिछले 20 सालों से सामाजिक कार्यों और जागरूकता से जुडी कई संस्थाओं और संगठनों में अलग-अलग पदों पर सेवा रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 9466526148 (वार्ता) (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) 333,Pari Vatika, Kaushalya Bhawan, Barwa, Hisar-Bhiwani (Haryana)-127045 Contact- 9466526148, 01255281381 facebook - https://www.facebook.com/saty.verma333 twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh