कथा साहित्य

कहानी

बुढ़ापे की लाचारी और कमज़ोर होते जिस्म ने उनकी हिम्मत को और तोड़ दिया था।

शाम का वक्त था। बाहर हल्की-हल्की फुहार पड़ रही थी और लिविंग रूम में दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक

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