प्रतिरोध
हाथियों, तेंदुओं, भेड़िए, जहरीले साँपों तथा अन्य जंगली जानवरों का आतंक दिनों दिन बढ़ता चला जा रहा था। वहाँ अस्थायी
Read Moreशाम का वक्त था। बाहर हल्की-हल्की फुहार पड़ रही थी और लिविंग रूम में दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक
Read Moreवह अमीर तो बहुत था. क्या कुछ नहीं खरीद सकता था. आज भी वह कुछ खरीदने निकला. अलबत्ता रोज़ के
Read Moreवक्त की धूप-छांव और पगडंडियों से गुजरते हुए ज़िंदगी कब एक ऐसे मोड़ पर आ पहुँचती है, जहाँ सिवाय अहसासों
Read More“काकू, तू लॉन की घास काट ले। मैं तब तक खाना बनाकर आता हूँ।” भोलू अपने बेटे को लॉन और
Read More‘जीने के संघर्ष में जूझते हुए, मैं एक तथ्य को समझ गई हूँ, मनोज!’ रत्ना अपनी बात पूरी कर पाती,
Read Moreअंतिम दर्शन हेतु उसके चेहरे पर रखा कपड़ा हटाते ही वहाँ खड़े लोग चौंक उठे। शव को पसीना आ रहा
Read More(“औलाद दरख़्त की तरह होती है… माँ-बाप उसे अपने खून-ए-जिगर से सींचते हैं, उसे जवान करते हैं, उस पर फ़ूल
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