Author: *सविता सिंह 'मीरा'

कविता

मौन अधर

मौन अधर हैं, पलकें बोझिल,प्रेम अनावृत धार रहा,स्वार्थ-पूर्ण इस मरु-दुनिया में,दिव्य-स्नेह विस्तार रहा। प्रिय की एकाग्रता अनूठी,शब्दहीन संधान करे,नित निष्काम

Read More
कविता

अनुराग वृष्टि

नव जलधारा अवतरित धरा पर,सिक्त हुआ अंतर्मन,विकसित हुईं हृदय-कलिकाएँ,सुरभित गृह-प्रांगण। अव्यक्त भाव हैं अंतस में,विरह-वेदना तज देना,नव आगमन हो तो

Read More