आईसीयू के बाहर की देहरी
जहां दो तरफा जिंदगी वेंटिलेटर पर होती है।आईसीयू का वो बंद दरवाजा… जिसके अंदर मशीनों की बीप-बीप है और बाहर
Read Moreजहां दो तरफा जिंदगी वेंटिलेटर पर होती है।आईसीयू का वो बंद दरवाजा… जिसके अंदर मशीनों की बीप-बीप है और बाहर
Read Moreनभ-मण्डल से उतरी ज्योत्स्ना,रची विधाता ने यह तृष्णा।तुम अनंत शृंगार-प्रतीक,गरिमामय सौन्दर्य अतीक॥ अचल आस्था के आधार,मम स्वप्नों के भव्य आकार।नक्षत्रों
Read Moreकहा जाता है कि विश्वास दिखाई नहीं देता, केवल महसूस होता है। आस्था का भी यही स्वभाव है। वह तर्क
Read Moreमौन…समझे कौन?उफ़! इस शोर-शराबे में,शब्द सभी हो गए थे गौण। तभी कहीं से स्वर उभरा—“कौन है, जो आया आज?”कोलाहल के
Read More“मम्मी, अभी नहीं… शाम को ले आएँगे।” मेरे इतना कहते ही माँ की आँखें कहीं दूर टिक गईं। धीमे स्वर
Read Moreऐसा पहली बार हुआ था कि नंदिनी घर से बाहर निकली और आदतन पलटकर पीछे देखा, पर उसे विदा करने
Read Moreहृदय के भीतरन जाने कितने ब्रह्मांड बसते हैं।विचार कभी ग्रह बनकरपरिक्रमा करते हैं,कभी टूटते तारों-सेबिखर जाते हैं। कुछ स्मृतियाँ चाँद
Read Moreक्यों मन मलिन उदास सखे,याद किसी की आई है?बैठे हो सरि के कूल परदखे किसकी परछाई है? क्यों चौंक मुड़े
Read Moreकल तक मौन थी, आज महक रही है।फूल ने समझाया जीवन में सबसेसुंदर परिवर्तन शोर से नहीं,धीरे-धीरे और चुपचाप होते
Read More