दादी की महक
ऐसा पहली बार हुआ था कि नंदिनी घर से बाहर निकली और आदतन पलटकर पीछे देखा, पर उसे विदा करने
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Read Moreहृदय के भीतरन जाने कितने ब्रह्मांड बसते हैं।विचार कभी ग्रह बनकरपरिक्रमा करते हैं,कभी टूटते तारों-सेबिखर जाते हैं। कुछ स्मृतियाँ चाँद
Read Moreक्यों मन मलिन उदास सखे,याद किसी की आई है?बैठे हो सरि के कूल परदखे किसकी परछाई है? क्यों चौंक मुड़े
Read Moreकल तक मौन थी, आज महक रही है।फूल ने समझाया जीवन में सबसेसुंदर परिवर्तन शोर से नहीं,धीरे-धीरे और चुपचाप होते
Read Moreपलकों में जो छुपा हुआ था,वह पैगाम सुनहरा है।आज खुला है राज हृदय का,रंग यह बेहद गहरा है।अधरों का वह
Read Moreमैं हूँ स्त्री, मैं ही पुरुष, अर्द्धनारीश्वर की हूँ कृति,फिर क्यों जग के इस आँगन में, होती हमारी दुर्गति? हाँ
Read Moreशुष्क है यह भग्न उरनीर नयनों में भराताप विरहाग्नि सहे,कंपित हुई यह धरा।तिमिरमय इस चेतना मेंभोर फिर से क्या उगेगी?तृप्ति
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