वो ठूँठ
रास्तों के दोनों ओरउग आए हैं वृक्ष हज़ारों।अंबर छूने की आकांक्षा में,वितान बन छा जाते हर बार। हरी-भरी शाखों पर
Read More“क्या हुआ निखिल? इतनी दूर से क्या इशारा कर रहे हो… कुछ समझ नहीं आ रहा।” कहकर नंदिनी फिर कार्यक्रम
Read Moreहर रोज़ ये चाँदगगन से उतरकरमेरी मुंडेर पर आकरपर्दों में उलझ जाता है। वो आता है संदेश लिएकिसी के उस
Read Moreकभी कभी कुछहो जाता लेकिन क्याठीक-ठीक कुछकहा नहीं जा सकता।बस इतना सा अहसास किकभी-कभी, बिना किसी अपेक्षा के,बिना किसी स्वार्थ
Read Moreयात्राएँ केवल स्थान परिवर्तन नहीं होतीं, वे आत्मा के भीतर घटित होने वाली सूक्ष्म हलचलों का विस्तार होती हैं। कुछ
Read Moreकभी-कभी साइड लोअर बर्थ परवो चुपके से आ जाता है,बिन कहे ही मेरे पास बैठमुझको मुझसे चुरा जाता है। नदी,
Read Moreघर का हर इक कोना सूना है तेरे बिना,कैसे कह दूँ जीना मुमकिन है तेरे बिना। खिलखिलाहट, हँसी, वो मासूम
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