मुक्तक/दोहा

माँ चालीसा

॥दोहा॥

ममता सागर रूप तू, करुणा की पहचान।
माँ तेरे चरणों में बसे, मेरा सारा मान॥
तन-मन-धन सब वार दूँ, तुझ पर जीवन प्राण।
जननी तेरी छाँव में, मिलता सच्चा ज्ञान॥

॥चौपाइयाँ॥

जय जय जय हे मातु हमारी।
तू जग में सबसे हितकारी॥
तेरी ममता गंगा धारा।
पावन करती जीवन सारा॥
कोख तिहारी मंदिर पावन।
जहँ उपजत मानवता सावन॥
पहली गुरु तू पहली वाणी।
तू ही जीवन की निगरानी॥
तेरी गोदी सुख का सागर।
दूर करे सब भय के नागर॥
तेरे आँचल की छवि न्यारी।
जैसे अम्बर चाँद उजियारी॥
भूखी रहकर पेट भराया।
हँसकर हर संकट झुठलाया॥
रात-रात भर जागन हारी।
नींद हमारी रखनिहारी॥
चलना,बोलना,सिखलाया।
मानवता का पाठ पढ़ाया॥
गिरने पर तू हाथ बढ़ाती।
रोने पर तू गले लगाती॥
तेरी डाँट अमृत सी लागे।
उसमें छिपे प्रेम के धागे॥
तेरा क्रोध भी हित उपजावे।
भटके पथ को राह बतावे॥
माँ तू धरती माँ तू गगना।
तू ही जीवन दीप सुहागना॥
तेरे बिन सूना घर-द्वारा।
तू ही कुल का भाग्य सितारा॥
तेरी पूजा सबसे न्यारी।
देव करें वंदन तुम्हारी॥
राम मिले कौशल्या माई।
कृष्ण यशोदा गोद समाई॥
शिवा समान वीर बन जाते।
माँ के संस्कार जगाते॥
झाँसी वाली रानी जैसी।
माँ ने दी थी शिक्षा ऐसी॥
त्याग तपस्या रूप तिहारा।
सह लेती दुख भार अपारा॥
अपने आँसू पी मुस्काती।
सुत की पीड़ा दूर भगाती॥
तेरे चरण कमल सुखदाई।
वहाँ बसे हर सिद्धि-सम्पदाई॥
दूध तेरा अमृत रस धारा।
ऋण तेरा न उतरे सारा॥
जब जग हमको ठुकराता है।
माँ ही गले लगाता है॥
सुख में सब संबंध निभाते।
दुख में माँ ही साथ निभाते॥
तेरे मन में छल न कपट है।
माँ तेरा हृदय स्वयं भगवत है॥
तेरे जैसा मित्र न कोई।
तेरे जैसा हितकर होई॥
जननी तू वरदान विधाता।
जीवन की तू प्रथम त्राता॥
तेरे चरणन धूलि जो पावे।
उसका भाग्य स्वयं मुस्कावे॥
तेरी वाणी मंत्र समाना।
हर ले मन का दुख पुराना॥
तू संस्कारों की फुलवारी।
तू परिवारों की रखवारी॥
माँ से बढ़कर तीर्थ न दूजा।
माँ सेवा ही सच्ची पूजा॥
जो जन माता मान बढ़ावै।
उस पर जग कल्याण बरसावै॥
माँ आशीष कवच बन जाती।
हर विपदा को दूर भगाती॥
तेरी छवि मन भीतर वासी।
तू ही मेरी शक्ति प्रकाशी॥
भूले राह अगर संताना।
माँ बन जाती दिव्य ठिकाना॥
तेरे चरणों में स्वर्ग समाया।
तेरे बिना जग व्यर्थ दिखाया॥
जननी तू भगवान स्वरूपा।
तेरे बिना जीवन है अधूरा॥
ममता, दया, क्षमा की खानि।
तू ही जग की सच्ची रानी॥
तेरे ऋण से जग झुक जाता।
तेरा यश गाकर नित गाता॥
माँ तू प्रेम अनंत कहानी।
तुझसे सुंदर नहीं निशानी॥
जो यह माता चालीसा गावै।
माँ का असीम आशीष पावै॥
मन में श्रद्धा प्रेम बढ़ेगा।
जीवन पथ उजियारा होगा॥

॥ दोहा॥

माँ चरणन की रज बिना, सूना सब संसार।
जननी तुमसे ही खिले, जीवन का हर द्वार॥
ममता मूर्ति मातु को, बारम्बार प्रणाम।
तेरे चरणन में मिले, मुझको चारों धाम॥

— गोपाल कौशल भोजवाल

गोपाल कौशल "भोजवाल"

नागदा जिला धार मध्यप्रदेश 99814-67300

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