कविता

ख़ामोशी ही इश्क की महकती हुई सुगन्ध है

धीरे से उतरती है
रात की रेशमी चादर पर
तुम्हारी याद की आहट

बोलते नहीं लफ़्ज़
फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं
नज़रों की जुबान में

जहाँ शब्द थक जाते हैं
वहीं से शुरू होती है
इश्क की असली कहानी

ख़ामोशी के दामन में
छुपा होता है
दिल का सबसे सच्चा रंग

हर धड़कन में
तुम्हारा नाम नहीं
तुम्हारा एहसास बसता है

हवा भी जब गुजरती है
तो जैसे
तुम्हें छूकर लौटती है

मैं सुनता हूँ
बिना आवाज़ के भी
तुम्हारी मौजूदगी को

ये जो ठहराव है
यही तो असली संगीत है
प्रेम का अदृश्य राग

चाँद भी चुप है आज
शायद वो भी
इश्क में डूबा हुआ है

ख़ामोशी की इस भाषा में
सबसे गहरी बातें
सबसे हल्की होकर उतरती हैं

और अंत में
सब कुछ शांत होकर भी
बहुत कुछ कह जाता है

ख़ामोशी ही इश्क की महकती हुई सुगन्ध है

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com

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