कविता

इंसानियत का दर्ज़ा पाने ऐसा गुण चाहिए

भावना को समझने के लिए मन चाहिए,
दुखों को समझने के लिए अपनापन चाहिए।
ईश्वर को समझने के लिए श्रद्धा चाहिए,
और इंसान को समझने के लिए इंसानियत चाहिए।

रिश्तों को निभाने के लिए विश्वास चाहिए,
जीवन को सँवारने के लिए मधुर अहसास चाहिए।
सत्य के पथ पर चलने को साहस चाहिए,
हर दिल को जीतने के लिए विनम्र स्वभाव चाहिए।

क्षमा करने के लिए विशाल हृदय चाहिए,
प्रेम बाँटने के लिए निर्मल उदय चाहिए।
मुस्कानों की खेती में करुणा का बीज चाहिए,
मानवता के मंदिर में सेवा का दीप चाहिए।

सफलता को सजाने के लिए संस्कार चाहिए,
सम्मान कमाने को उत्तम व्यवहार चाहिए।
अंधेरों से लड़ने को आशा का प्रकाश चाहिए,
हर कदम पर बढ़ने को दृढ़ विश्वास चाहिए।

जीवन को सार्थक करने को सत्कर्म चाहिए,
हर श्वास में प्रेम और पावन धर्म चाहिए।
किशन मन में दया और हृदय में सत्य समा जाए,
तभी धरती पर इंसान,सचमुच इंसान कहलाए।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

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