प्यारे बच्चे
नन्हे-नन्हे प्यारे बच्चे,
हँसते और मुस्काते।
मिल-जुलकर जब खेलें सारे,
मन को बहुत लुभाते।
झूला झूलें, खेलें-कूदें,
खुश होकर इतराते।
कभी खिलौने, कभी कहानी,
मिलकर खूब सुनाते।
गेंद उछालें, दौड़ लगाएँ,
मस्ती खूब मनाएँ।
छोटी-छोटी मीठी बातें,
सबके मन को भाएँ।
प्यार बाँटें, साथ रहें हम,
मिलकर गीत सुनाएँ।
बचपन के ये प्यारे दिन,
फिर लौटकर न आएँ।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
