लौटकर हर जन्म में मैं हिन्दुतान आता हूं
मैं भारत का फौजी हूँ भारत के गीत मैं गाता हूँ
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
बेशक कुर्बान हो गया मैं सरहद पर लड़ते लड़ते
लौट कर हर जन्म में मैं हिन्दुतान आता हूं
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
नहीं मानता करता रहता शरारत वह बार बार
कर दिया था हमने बंगला देश बनाकर इसको दोफाड़
नब्बे हज़ार सैनिक गिगिड़ाये थे हमारे वीरों के आगे
चटगांव बंदरगाह पर जब मारी थी हमारे वीरों ने दहाड़
उन वीरों को नमन करें हम सबको यह समझाता हूँ
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
दुश्मन कारगिल द्रास की चोटियों पर बैठ गया
सोच कर यह कि हिंदुस्तान को नहीं है खबर
युद्ध हुआ कारगिल में हमने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए
चोटियों पर जो बैठे थे नसीब नहीं हुई उनको कब्र
कुछ लौट कर जो घर नहीं आये उनकी याद दिलाता हूं
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
चीन भी लगा रहता है करता रहता है
सीमा का उलंघन बार बार
गलवान में ठोका हमने चालीस को
दिया मौत के घाट उतार
चीन भूल जाये 1962 को
आधुनिक भारत की मैं ताकत दिखाता हूं
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
देश मेरा भारत है है माता भारती
उठो मेरे देशवासियो मां है पुकारती
उनका ख्याल रखो जो सीमा के है पहरेदार
उनकी बदौलत जीती हूँ हमेशा कभी नहीं मैं हारती
देश पहला प्रेम है मेरा यह सबको बतलाता हूँ
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
बार बार पिटने के बाद भी नहीं सँभलता है
कभी आतंकी भेजता है कभी सीमा पर चालें चलता है
कुत्ते की पूंछ है कभी सीधी नही होगी
हर बार मुंह की खाता है फिर हाथ मलता है
सर्जिकल स्ट्राइक करता हूँ घर में घुस कर मार आता हूँ
जो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँ
— रवींद्र कुमार शर्मा
