युवा पीढ़ी क्यों गांवों को भूलती जा रही
एक दिन वह गांव का घर भी छूट जाएगावह शहर का घर भी नहीं बचा पायेगाजाना तो पड़ेगा अकेले उस
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Read Moreउठता है सुबह तड़केडालता है सिरहाने के नीचे हाथनिकालता है बीड़ी का बण्डल और लाइटरजलाता है बीड़ी खींचता है जोर
Read Moreराखी भाई बहन के प्यार का अनूठा है बंधनजो बड़ी धूमधाम से हर वर्ष मनाया है जाताबहुत दूर भी रहते
Read Moreभारत माता के रखवालेभारत माँ पर मिटने वालेअपनी धुन के पक्के सिपाहीकाम जो कर गए अजब निराले गुलामी भारत माता
Read Moreसन उन्नीस सौ तिहत्तर की है यह बातनहीं भूलती अब भी वह कष्टकारी रात‘कच्चे धागे’ फ़िल्म लगी थी मंडी कृष्णा
Read Moreमैं भारत का फौजी हूँ भारत के गीत मैं गाता हूँजो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँबेशक
Read Moreएक आदमी ने नया ख़रीदा टच स्क्रीन फोनजिसके लिए बैंक से ले लिया दस हज़ार का लोनलोगों के सामने नया
Read Moreजब निकला खाने की तलाश में इधर उधरतो मैं आवारा हो गयालोगों को अब मैं अच्छा नहीं लगतामेरी शक्ल देखना
Read Moreआज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
Read Moreन वह चूल्हे की रोटी न वह घड़े का पानीबदल सी गई कुछ ऐसी ज़िंदगानीबुढापा भी कुछ और सा बीत
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