टूटते रिश्ते और बदलती प्राथमिकताएं
आज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
Read Moreआज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
Read Moreन वह चूल्हे की रोटी न वह घड़े का पानीबदल सी गई कुछ ऐसी ज़िंदगानीबुढापा भी कुछ और सा बीत
Read Moreबाहर ही मिलता है सब कुछयह नासमझी की हैं बातेंअमेरिका और कनाडा की रातों सेहैं सुंदर मेरे भारत की रातें
Read Moreमानवता खतरे में पड़ी है यह सबको है समझानाप्रकृति से खिलवाड़ नही करना पर्यावरण है बचानाउन्नति के नाम पर जो
Read Moreजिस्म के मर जाने से रिश्ते मरा नहीं करतेघड़े में छेद हो जाये तो घड़े भरा नहीं करतेरूह निकल जाती
Read Moreजितनी भी ज़िन्दगी कटी है सब तेरे नामबुरा किया अच्छा किया है सब तेरा कामजैसी बुद्धि दी तूने है उसी
Read Moreराजनीति आजकल बदनाम हो गईफ्री की आदत अब आम हो गईदस बार मुकर जाते हैं सुबह से शाम तकझूठ बोलना
Read Moreजीवन की है सच्चाई यहीआना है और एक दिन चले जाना हैपतझड़ के सूखे पत्ते की तरहगिरना है और बिखर
Read Moreआज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
Read Moreजिसने सारी दुनियां पर अपनीआवाज से सालों किया राजलता की थी छोटी बहनखामोश हो गई आज वह आवाज आशा ताई
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