बर्फ के पहाड़
गिरती है जब बर्फचमक उठते है पहाड़सफेद चादर से ढकेआंखे चुंधिया जाती है देख करपहाड़ी के लिए आम है बर्फ
Read Moreगिरती है जब बर्फचमक उठते है पहाड़सफेद चादर से ढकेआंखे चुंधिया जाती है देख करपहाड़ी के लिए आम है बर्फ
Read Moreवह भी दिन थे जब पिछड़ी हुई थी कोटधारदूर इतनी थी जैसे जाना हो सात समुंदर पारघुमारवीं से झंडूता मांडवा
Read Moreफौजी बोलना जितना होता है आसानउतना ही कठिन होता है फौजी बननाशांति में भी उग्रवादियों से लेना पड़ता है लोहायुद्ध
Read Moreवो भी क्या दिन थे जब हम ऐसे गांव में थे रहतेजहां रिश्ता लगा कर थे सब को बुलातेकोई बंदिश
Read Moreकल तक जिसको खूब नकाराआज उसको गले हैं लगातेकैसे कैसे लोग है इस दुनियां मेंमौका देखते ही पाला बदल जाते
Read Moreक्या तारीफ करूँ मैं अपने शहर कीमेरे शहर का है अद्बुत नज़ारापहाड़ों के बीच बसा शहर घुमारवींसीर गंगा का है
Read Moreबिना तार के इस ज़माने में चलते हैं फोनलकड़ी बिना जलाये चलती है गैसकारें बिना चाबी के चल रहीबिना घी
Read Moreनम आंखों का हर अश्क कहता एक कहानीबुढ़ापा सबको आएगा नहीं रहेगी जवानीक्यों आदमी फिर भी जकड़ा है मैं नेपड़ेगी
Read Moreबहुत मुश्किल से मिली है यह ज़िन्दगीकैसे जियें इसको यह है अपने हाथदुखी रहा वो जो और की चाह करता
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