कविता

कैसे कैसे लोग हैं इस दुनियां में

कल तक जिसको खूब नकारा
आज उसको गले हैं लगाते
कैसे कैसे लोग है इस दुनियां में
मौका देखते ही पाला बदल जाते

कोई मौका था देखते ही नाक भौं थे चढ़ाते
हर सभा में देते थे गालियां दूर थे भगाते
समय ने पलटी मारी किस्मत बदल गई
फिरते हैं आज उसी के पीछे दुम है हिलाते

हद से आगे बढ़ने से होता है काम खराब
बड़ी हेकड़ी वालों को कर देता है बर्बाद
समय नहीं रखता किसी का भी उधार
समय आने पर समय कर देता है बराबर हिसाब

समय सब का आता है मत करो अहंकार
दुआएं लीजिये जो कभी नहीं जाती बेकार
कल क्या होगा यह तो केवल वही है जानता
नशा कोई भी हो समय देता है उतार

डूबा जो अहंकार में हो गया सर्वनाश
कई उदाहरण हैं देखिए अपने आस पास
विपदा आने पर वह भी दूर हो गए
अच्छे समय में जो होते थे कभी खास

— रवींद्र कुमार शर्मा

*रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं जिला बिलासपुर हि प्र