कविता

स्त्री प्रेम

मैं जानती हूँ
शब्दों में नहीं
तुम्हारा प्रेम
उपस्थिति में है
स्वीकृति में है
तुम्हारी चुप्पी में है
उपेक्षा नहीं सम्वेदना है
ज़िम्मेदारी भरा अहसास है
मैं तुम्हारे डर पहचानती हूँ
वे जिन्हें तुम
मजबूती के पीछे छुपा लेते हो
तुम्हारी असफलताएँ
मुझे कमज़ोर नहीं करतीं
वे मुझे और पास ले आती हैं
मुझे हार–जीत नहीं
मुझे वह साथ चाहिए
जो कठिन दिनों में
कंधा बन जाए।
तुम्हारा साथ
हाथों में हाथ
एक विश्वास
जिसे किसी ढाल की जरूरत नहीं है
और हाँ— रिश्तों में मधुरता
शब्दों से नहीं
कभी-कभी
साथ चुप बैठने से भी
जन्म लेती है।

— नील मणि

नील मणि

एक कार्टूनिस्ट और लेखक के रूप में सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक जीवन के विविध रंगों को अपने व्यंग्य, रेखाचित्रों, कविताओं और कहानियों के माध्यम से जीवंत करने की कोशिश में हूँ। स्वतंत्र लेखन में संलग्न हूँ। मेरी रचनाएँ व कार्टून्स विभिन्न प्रतिष्ठित, सरकारी, देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। मोबाइल नंबर -9412708345 मेरठ – 250001 (उत्तर प्रदेश)

One thought on “स्त्री प्रेम

  • *राजकुमार कांदु

    सुंदर सृजन !

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