लघुकथा

अगला पड़ाव

क्लिनिक में एक युवा लड़की आई — चेहरा सुंदर, लेकिन बेचैनी साफ झलक रही थी। डॉक्टर ने चश्मा ठीक किया और मुस्कुराते हुए पूछा—“हाँ बेटा, क्या परेशानी है?”
लड़की ने धीमे स्वर में बताया — “डॉक्टर मैम, थोड़ा इन्फेक्शन, कमजोरी और वो… कुछ अनकंफर्टेबल महसूस होता है।”
डॉक्टर ने सामान्य जांच शुरू की और प्रश्नों की झड़ी लगा दी— “नहाती हो?”
“जी, रोज।”
“गीले कपड़े तो नहीं पहनती?”
“नहीं।”
“गंदगी या स्वच्छता में लापरवाही?”
“कभी नहीं।”
डॉक्टर कुछ पल चुप रहीं, फिर पूछा —“बॉयफ्रेंड है?”
लड़की ने झेंपते हुए कहा —“जी।”
“आर यू सेक्सुअली एक्टिव?”
लड़की की आँखें झुक गईं— “जी, पर… हमारी शादी छह महीने में होने वाली है।”
डॉक्टर मुस्कुरा दीं — पर वो मुस्कान करुणा से ज़्यादा अनुभव की थी। धीरे से बोलीं— “अरे बेटा… सब कुछ पहले ही लुटा दोगी तो शादी के बाद क्या?”
लड़की चुप।
डॉक्टर ने चश्मा उतारते हुए कहा— “देखो, आधुनिक होना बुरा नहीं, लेकिन अधीर होना ज़रूर बुरा है। स्वतंत्रता तभी सुंदर लगती है जब उसमें संयम का साथ भी हो।”
लड़की धीरे से बोली— “जी डॉक्टर, गलती हो गई…
डॉक्टर मुस्कुराईं — “शादी रस्म नहीं, ज़िम्मेदारी है… और कुछ चीज़ें समय पर ही अच्छी लगती हैं, वरना स्वाद बिगड़ जाता है। अनुभव से पहले परिपक्वता जरूरी है, वरना ‘अगला पड़ाव’ सिर्फ पछतावा बन जाता है।”

— नील मणि

नील मणि

एक कार्टूनिस्ट और लेखक के रूप में सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक जीवन के विविध रंगों को अपने व्यंग्य, रेखाचित्रों, कविताओं और कहानियों के माध्यम से जीवंत करने की कोशिश में हूँ। स्वतंत्र लेखन में संलग्न हूँ। मेरी रचनाएँ व कार्टून्स विभिन्न प्रतिष्ठित, सरकारी, देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। मोबाइल नंबर -9412708345 मेरठ – 250001 (उत्तर प्रदेश)