किस्मत के हारे हम
किस्मत के हारे हम
लो कहां आ गए हम
एक मुश्किल रास्ते को पार किए हम
दूसरे मुश्किल रास्ते पर फिर आ गए हम
किस्मत के हारे हम
मंजिल क्या थी भूल गए हम
एक मुसीबत से निकलकर
दूसरी मुसीबत में फंस गए हम
किस्मत के हारे हम
न मंजिल मिली न किनारा मिला
मिली तो सिर्फ निराशा मिली हमें
अब तो खुद से ही रूठे हैं हम
दुनिया से क्या नाराजगी
हम तो खुद की ख्वाहिश पूरी न कर सके हम
किस्मत के हारे हम….
— गंगा मांझी
