ग़ज़ल
दुश्मनों को यूँ हराया जाएगा
डर दिलों से अब हटाया जाएगा
दबदबा अपना दिखाया जाएगा
प्यार का गोला चलाया जाएगा
गर पुराना हो चुका पूरा ख़राब
इक नया सिस्टम बनाया जाएगा
फल लगे होंगे मियाँ जिस पेड़पर
छोड़ सब उसको हिलाया जाएगा
आदमी अच्छा लगेगा जब मियाँ
हाथ उससे तब मिलाया जाएगा
— हमीद कानपुरी
