Author: *हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फ़र्ज़ हर पल  निभा रहा  हूँ मैंहर  गिरे  को  उठा  रहा  हूँ  मैं इक ग़ज़ल  यार गा  रहा  हूँ मैंआप  बीती   सुना  रहा   हूँ मैं बात इसके सिवा नहीं  कहनाउससे कहना  बुला  रहा  हूँ मैं जग की परवाह अब

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