Author: *हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फ़र्ज़ हर पल  निभा रहा  हूँ मैंहर  गिरे  को  उठा  रहा  हूँ  मैं इक ग़ज़ल  यार गा  रहा  हूँ मैंआप  बीती   सुना  रहा   हूँ मैं बात इसके सिवा नहीं  कहनाउससे कहना  बुला  रहा  हूँ मैं जग की परवाह अब

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गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हाल न पूछो अज़मत काअपने  आला  हज़रत का पूरी   दुनिया    देख   रहीनाटक सब है  दौलत  का सत्ताधारी     खेल      रहेखेल  तमाशा ताक़त  का झेल  न   पाता  जीवन येजन कीज़्यादा गफलतका माँ  के  क़दमों  के   नीचेरस्ता   सीधा   जन्नत  का — हमीद कानपुरी

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