गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 26/02/202626/02/2026 ग़ज़ल चाहता है बशर अगर बरकत।मांँग ले रब से बारहा रहमत। हर दुआ अर्श तक पँहुचती है,हर सदा खूब सुन रही Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 15/01/202615/01/2026 ग़ज़ल जा के मग़रूर से मिला न करोएक रत्ती कभी दबा न करो बात अपनी सदा कहो खुलकरशर्म इसमें कहीं ज़रा Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 09/01/202609/01/2026 ग़ज़ल अब की भटकनकल की उलझन दर- दर भटकेकर के अनबन सब से अच्छास्थिर सा है मन सेहत चाहेतोड़े सहजन जी Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 05/01/202605/01/2026 ग़ज़ल बे सबब ही कहीं भिड़ा न करोबे सबब चीज़ को चुना न करो रास्ता इस तरह जुदा न करोप्यार Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 05/01/202605/01/2026 ग़ज़ल रास्ता इस तरह जुदा न करोप्यार की ऐसी इन्तिहा न करो हौसला गर नहीं जिगर में हैतबकठिनकोई इब्तिदा न करो Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 17/12/202517/12/2025 ग़ज़ल अब न कोई लन तरानी चाहिएहर बयां में हक़ बयानी चाहिए एक लय में सुर सरानी चाहिएअब ग़ज़ल में इक Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 07/12/202507/12/2025 ग़ज़ल अगर देश को नफरतों से बचानातो फिर खोल दोउल्फतों का ख़जाना लुटा जो चुके मुल्क पर कुल घरानावही गा रहे Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 10/11/202510/11/2025 ग़ज़ल वो कमसिन दौर सेही बदचलन है।नहीं इस रोग का कोई शमन है। जगाते शाह को भी चोर को भी,सियासत का Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 07/11/202507/11/2025 ग़ज़ल खूब थपेड़े सहते हैंजो धारा में बहते हैं शौक़ीन तबीयत वालेउम्दा उम्दा गहते हैं होते हैं जो यार लचीलेदेर तलक Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 04/11/202504/11/2025 ग़ज़ल चैन की इक नहीं घड़ी देखीजब सनम आँख में नमी देखी बढ़ गयी रोशनी की क़ीमत औरजब से आँखों Read More