बेचारा कद्दू
क्या आपको लगता है कि सब्जियां भी सम्मानित या हास्यास्पद हो सकती हैं, लेकिन मैं ने तो महसूस किया है। पनीर के राजसी ओहदे के मुकाबले इसे सब्जियों में गरीबी रेखा से नीचे जीने वाली सब्जी जैसा बर्ताव किया जाता है।किसी पार्टी के मेन्यू में बेचारे कद्दू को कोई स्थान नहीं दिया जाता। फिर भी बिन बुलाए मेहमान सा हर घर में पहुंच, अपनी उपयोगिता जता ही देता है। एक बार मैं ने कह दिया एक कद्दू की सब्जी भी बनवा लेते हैं तो छोटे बच्चे ने ही मुंह बना कर कहा कद्दूउऊ … पार्टी में कौन बनवाता है। वैसे भी कद्दू को भंडारे की सब्जी माना जाता है, स्वाद तो सबको लगती है और खाते भी मन भर कर हैं, फिर भी सस्ती सब्जी मान कर स्वीकारने में झिझकते हैं।
खैर! हमारे यहां यू. पी. में शादी ब्याह हो, ब्राह्मण भोज हो, कथा भागवत हो या श्राद्ध पक्ष में बनने वाला भोजन, सब में पूरी और कद्दू की सब्जी ही प्रिय भोजन है। साथ में दही, छाछ, रायता मिल जाय तो अहो भाग्य। लेकिन अब कद्दू के दिन बदल रहे हैं, केवल सब्जी रायता ही नहीं, ये भी कोफ्ते की शक्ल इख्तियार करने लगा है, हलवे के रूप में महकने लगा है। बुजुर्गों को तो पहले भी अच्छा लगता था, नई पीढ़ी को भी अच्छा लगने लगा है। वाह कद्दू वाह!
अब तो कई जगह मार्केट के नाश्ते में, दाल की बेड़मी पूरी संग खट्टे मीठे कद्दू की सब्जी ने अपनी पैठ बना ली है। आहार विशेषज्ञों की मानें तो विटामिन ए, सी, पोटेशियम, बीटा कैरोटीन, जिंक, मैग्नीशियम, फाइबर, इम्यूनिटी बूस्टर, पाचक, पोषण से भरपूर होता है। मिजाज में कद्दू पकने से पहले जितना कठोर दिखता है, पकने के बाद उतना ही विनम्र, मुलायम। पूरी परांठे के साथ खाएं या चावल के साथ, सब के साथ एडजस्ट हो जाता है।
“घर के जोगी जोगना, आन गांव के संत” यह बात कद्दू पर पूरी तरह सत्य प्रतीत होता है। भारत में जहां इसे साधारण सा माना जाता है, विदेशों में कद्दू की विशेष पूछ है। मेले के आयोजन होते हैं। अक्टूबर, नवंबर माह में अमेरिका और यूरोपीय देशों में कद्दू का हैलोवीन, शरद ऋतु की फसल के जश्न उत्सव के रूप में बहुत जोर शोर से मनाया जाता है। जिसमें कद्दू की तरह तरह के व्यंजन, मिठाइयां, आकृतियां बनाई जाती हैं। भारतीय घरों में कद्दू की सब्जी को एक समझौते के रूप में या अहसान की तरह स्वीकार किया जाता है। चलो ठीक है! खा लेंगे … हद तो जब हो गई जब हमारी माता जी ने घर के बगीचे में उगे कद्दू को बिटिया के यहां बच्चा होने पर, कुआं पूजन उत्सव पर मायके से भेजे जाने वाले सामान के साथ भेजा। वहां भी सबने इसे एक रस्म की तौर पर स्वीकारा, कि शायद यह मायके का कोई रिवाज होगा। अब आप ही बताइए, आपकी क्या राय है इस मासूम से दिखने वाले कद्दू के बारे में। खाने में किसी के लिए “सजा” तो किसी के लिए मजा हो सकता है कद्दू।
— मनु वाशिष्ठ

व्यक्तिगत रूप से मुझे कद्दू की सब्जी बहुत पसन्द है। यहाँ उसमें थोड़ा मीठा डालकर बनाया जाता है। वैसे हमारे गाँव में केवल मैथीदाने का छौंक लगाकर नमकीन ही बनाया जाता था। वह भी बहुत स्वादिष्ट होता है और कई बार कद्दू की सब्जी को दही में घोलकर उसका रायता भी बना लिया जाता है। वह भी बहुत स्वादिष्ट होता है। हमारे शहर आगरा में कचौड़ी की दूकानों पर कचौड़ी के साथ दी जाने वाली आलू की सब्जी में एक चम्मच कद्दू की मीठी सब्जी भी डाली जाती है।