फौजी बनना नहीं आसान
फौजी बोलना जितना होता है आसान
उतना ही कठिन होता है फौजी बनना
शांति में भी उग्रवादियों से लेना पड़ता है लोहा
युद्ध में तो फिर मोर्चे पर पड़ता है लड़ना
कठिन प्रशिक्षण पूरी सेवा में रहता है जारी
तभी तो एक कमांडो पड़ता है सौ पर भारी
अकेला भी पड़ जाए अगर युद्ध में कभी
पीठ नहीं दिखाता सफर रखता है जारी
देश की सुरक्षा के लिए तैयार हरदम है रहता
घर परिवार से दूर किसी से कुछ नहीं कहता
कभी सायचिन की ठंड कभी राजस्थान की गर्मी
कभी असम नागालैंड कश्मीर में उग्रवादियों से लड़ता
आपदा कहीं आ जाती देश में
एकदम से तब फौज को बुलाते
जब हम किनारे खड़े होकर हैं चिल्लाते
जिंदगी बचाने तब वह उफनती नदी में है कूद जाते
दंगा फसाद कहीं हो जाये देश में
तब भी फिर याद आते हैं सेना के जवान
जहाँ बाकी लोग कुछ कर नहीं सकते
वही आकर संभालते है फिर कमान
सर्दी गर्मी में रहते बार्डर पर तैनात
करते हैं मुकाबला कैसे भी हों हालात
उनमें भी होता है एक मासूम सा दिल
उनके भी होते हैं दिल के जज़्बात
— रवींद्र कुमार शर्मा
