कविता

हँसना मना है

आज हास्य दिवस है इस पर किसका वश है।

कहते हैं यमराज मित्र हँसना मना है

यही इस दिवस का सम्मान है।
मगर आप तो मानोगे नहीं,

इसीलिए तो आप जैसे बेवकूफों का इतना नाम है।
हास्य की कसम आप सबको
स्वस्थ, प्रसन्न रहना है
तो हँसना एकदम गैर जरुरी है
मगर आप सब ये गलती है मत करना
क्योंकि हँसने के लिए हँसना मना है।
हम आप सबसे ज्यादा शरीफ हैं
यमराज के यार हैं, सबसे बड़का लंबरदार हैं।
आप समझ गए तो आपका कल्याण कर देंगे
यदि नहीं समझे, और मुझ हँस दिए तो
सबको काला पानी की सजा दे देंगे।
हँसने का शौक अगर इतना ही रहा
तो यमराज की कसम हँसी का नामोनिशान ही मिटा देंगे,

हँसने और हास्य दिवस दोनों का अस्तित्व ही
खत्म कर हास्य दिवस को इतिहास बना देंगे।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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