कैसे कैसे लोग हैं इस दुनियां में
कल तक जिसको खूब नकाराआज उसको गले हैं लगातेकैसे कैसे लोग है इस दुनियां मेंमौका देखते ही पाला बदल जाते
Read Moreकल तक जिसको खूब नकाराआज उसको गले हैं लगातेकैसे कैसे लोग है इस दुनियां मेंमौका देखते ही पाला बदल जाते
Read Moreक्या तारीफ करूँ मैं अपने शहर कीमेरे शहर का है अद्बुत नज़ारापहाड़ों के बीच बसा शहर घुमारवींसीर गंगा का है
Read Moreबिना तार के इस ज़माने में चलते हैं फोनलकड़ी बिना जलाये चलती है गैसकारें बिना चाबी के चल रहीबिना घी
Read Moreनम आंखों का हर अश्क कहता एक कहानीबुढ़ापा सबको आएगा नहीं रहेगी जवानीक्यों आदमी फिर भी जकड़ा है मैं नेपड़ेगी
Read Moreबहुत मुश्किल से मिली है यह ज़िन्दगीकैसे जियें इसको यह है अपने हाथदुखी रहा वो जो और की चाह करता
Read Moreखुद को सुधारते नहीं कहते हैं ज़माना है खराबसंस्कारों की कमी ने कर दिया सब कुछ बर्बादआवोहवा ऐसी बदली की
Read Moreकद के थे छोटे इरादे के थे पक्केसादगी और ईमानदारी की थे मिसालगरीबी में पले बढ़े थे देखी थी करीब
Read Moreभले ही बसते हैं बहुत कम लोग उसमेंपर पेड़ों से भरा बहुत सुंदर है मेरा गांवजब मैं पढ़ता था अपने
Read More