कितना रोये होंगे वह पेड़
कितना रोये होंगे वह सेव से लदे पेड़जब चली होगी विभाग की उनपर कुल्हाड़ीक्या कसूर था उनका यदि सरकारी जमीन
Read Moreकितना रोये होंगे वह सेव से लदे पेड़जब चली होगी विभाग की उनपर कुल्हाड़ीक्या कसूर था उनका यदि सरकारी जमीन
Read Moreनज़र नज़र में होता है फ़र्क बहुतकोई नज़रें होकर भी है अंधादेखकर भी कर देता है कोई अनदेखादुनियां में सब
Read Moreक्यों हो रहा विनाश हर जगहसब जानते हैं पर हैं खामोशनियमों को रखते हैं ताक परसत्ता के नशे में होकर
Read Moreकभी सकूं से बैठ कर मिटा लीजियेअपने जीवन भर की थकानन जाने कब आ जाये मालिक का बुलावाखाली करवा ले
Read Moreमत किसी के दिल को यूं ही दुखानाहमेशा मीठा बोलना औरों के काम आनाअमीरों को देख कर रुख बदल लेते
Read Moreयह क्या हो रहा है यह कैसा है विकासपर्यावरण का हो रहा है सत्यानाशकैसे मिल रही आज्ञा पहाड़ काटने कीसरकारों
Read Moreकिसको पता था नहीं पहुंचेंगेचले थे घर से मंजिल की ओरउड़ने से पहले ही गिर गयाकट गई एकदम जीवन की
Read Moreमानवता खतरे में पड़ी है यह सबको है समझानाप्रकृति से खिलवाड़ नही करना पर्यावरण है बचानाउन्नति के नाम पर जो
Read Moreगुजरता हूँ जब भी कभी गांव की गलियों सेदेखता हूँ खंडहर बने वह घर जो कभी आबाद थेगिर चुके है
Read Moreगीदड़ की जब मौत है आतीउसको शहर की ओर है भगातीखून से रंगे है जिन आतंकियों के हाथचैन की नींद
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