कविता

वीर सपूत

आज जो हम आजाद घूम रहे
जो भी है आज हमारी शान
अज़ादी के लिए जिन्होंने दे दी जान
ऐसे थे वो वीर सपूत महान

लूटी थी जिन्होंने सोने की चिड़िया
ले गए थे लूट कर सब समान
बेड़ियों में जकड़ी थी भारतमाता
ज़ख्मी था दिल पांव थे लहूलुहान

आज भी सरहद पर खड़े हैं सीना तान
मेघ हों या बिजली कड़के होते नहीं परेशान
दुश्मन पर रहती है निगाह जैसे बाज की
कर देते है मिनटों में दुश्मन का काम तमाम

अमर हो जाते हैं वह जो हो जाते देश पर कुर्बान
इन्हीं वीर सपूतों से है आज मेरा भारत महान
दुनियां में बज रहा है डंका भारत के नाम का
झुकेगा नहीं बनी रहेगी इसकी शान

— रवींद्र कुमार शर्मा

*रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं जिला बिलासपुर हि प्र