कविता

बोझ

दिल का बोझ हल्का करने
रोना चाहता हूं आज जी भरकर
दर्द जो सीने में छुपा है
खत्म हो जाए यूं धीरे बहकर

नहीं रोकना चाहता इन आंसुओं को
बहने से मिलेगा बहुत सुकून
हर बूझा एहसास टूटेगा धीरे
क्यूं न उसे बहने दे, धीरे धीरे

खुद से भी अब मिल नहीं पाता
मैं कहां हूं, मुझे यह पता नहीं
आईना समझ देखा सबने अक्स अपना
मैं कैसा हूं, मुझे यह पता नहीं

खुशियों से जल्दी मुलाकात नहीं होती
साथ निभाते हैं तन्हाई अक्सर
हर चाहत पूरी नहीं होती
बस चुप रहता हूं, यह सोचकर

नींद पलकों में कम आती है आजकल
आंखों ने सपना देखना छोड़ दिया
आखिरी सांस तक रिश्ता बना रहे
यही बहुत है अब मेरे लिए

— श्याम सुन्दर मोदी

श्याम सुन्दर मोदी

शिक्षा - विज्ञान स्नातक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से प्रबंधक के पद से अवकाश प्राप्त, जन्म तिथि - 03•05•1957, जन्म स्थल - मसनोडीह (कोडरमा जिला, झारखंड) वर्तमान निवास - गृह संख्या 509, शकुंत विहार, सुरेश नगर, हजारीबाग (झारखंड), दूरभाष संपर्क - 7739128243, 9431798905 कई लेख एवं कविताएँ बैंक की आंतरिक पत्रिकाओं एवं अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित। अपने आसपास जो यथार्थ दिखा, उसे ही भाव रुप में लेखनी से उतारने की कोशिश किया। एक उपन्यास 'कलंकिनी' छपने हेतु तैयार

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