सांस्कृतिक संस्कार
संस्कारों की धूप मेंपलता है मन का वृक्षरीतियाँ देती हैं छाँव घर की देहरी परदीपक सा उजाला हैपरंपरा की बात
Read Moreसंस्कारों की धूप मेंपलता है मन का वृक्षरीतियाँ देती हैं छाँव घर की देहरी परदीपक सा उजाला हैपरंपरा की बात
Read Moreधूप में तपकरसीखा है जीवनरास्ता अपना काँटों की चुभनमुस्कान सिखातीसहना हरदम गिरकर संभलनाहर हार के बादजीत का स्वाद वक़्त की
Read Moreमौन सा सागरगहराई में छुपेअनकहे सपने कठोर सा रूपभीतर कोमल मनछांव सा स्नेह थामे हर दर्दहोंठों पर मुस्कानअडिग सा वृक्ष
Read Moreतजूर्बाचुपचाप चलकरज़िंदगी की किताब खोलता है गिरनाकमज़ोरी नहीं होतासमझ का पहला दरवाज़ा होता है हर चोटएक अनकही सीख हैजो भीतर
Read Moreसुबह की चाय मेंहल्की सी मुस्कान छिड़ीबातें फिर भी तीखी खिड़की के कोने परधूप और परछाई कीचुपचाप सी लड़ाई तुम्हारी
Read Moreबीते दिन की धूपमन के आँगन में आजधीरे उतरती यादों के धागेसमय से बुनते रहतेजीवन का ताना कल की परछाईआज
Read Moreरात का आँगनचुपचाप बिछा देता हैसपनों की चादर थकी पलकों परशांत उतरती है हवासमय सो जाता दीपक की लौ भीधीरे-धीरे
Read Moreसुबह की धुंध मेंसपने आँखें खोलते हैंथकती राहों पर भीकदम नहीं रुकते हैं हवा में प्रश्न हैंऔर समय के निशानहर
Read Moreशाम की दहलीज़पगचिह्न धुँधलाए सेमन ठहर-सा गया राहें चुप खड़ीकदमों की आहट मेंएक पुकार रही धूप उतर चलीसाँझ की नरम
Read Moreराहें थीं सीधीअचानक मुड़ गईंपवन के संग धूप के सायेचलते रहे कदमदिशा बदली सूखी सी मिट्टीअंकुर फिर भी फूटेआशा जगी
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