Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

हाइकु/सेदोका

प्रयास को इतिहास याद रखता है

छोटा प्रयासबनता है पर्वतधैर्य अटल पग बढ़तेराह स्वयं खुलतीमन अडिग तूफ़ानों मेंदीपक मुस्काएहौसला जीवित पसीने कीहर एक बूँदमोती बने हार

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हाइकु/सेदोका

बिहार की इकलौती उम्मीद

नई किरणमिटे अँधियाराजगे विश्वास सूनी राहआशा के पदचिह्नमन प्रफुल्ल माटी पुकारेमेहनत के बीजस्वर्ण प्रभात हर किसानसपनों की फसलमुस्कान बोए युवा

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हाइकु/सेदोका

मुसीबत में इंसानियत

मुश्किल घड़ीबढ़े दया के हाथजगे विश्वास। सूनी राहेंसाथ चले कोईमन सँभले। भीगा आँचलआँसू पोंछे जोवही अपना। रोटी बाँटीभूख हुई हल्कीमन

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हाइकु/सेदोका

हम ही भरोसे की पहचान हैं

विश्वास दीपअँधियारा हर लेमन उजले। सच्चे वचनरिश्तों की नींवअटल रहे। निर्मल मनछल से दूर रहेप्रेम खिले। संकट आएहाथ न छोड़ेंसाथ

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हाइकु/सेदोका

तन्हाइयों से रूबरू

शांत सांझ ढली,मन की पगडंडी पर,यादें मुस्काईं। सूना आँगन,ओस भिगोती पत्ते,मौन का गीत। चाँद अकेला,झील में झुककर देखे,अपना चेहरा। सूखी

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हाइकु/सेदोका

सुकून की तलाश में

शांत झील किन,मन ढूँढ़े उजियारा,मौन मुस्काए। पत्तों की सरगम,हवा कहे धीमे से,थमे व्याकुलता। ओस की बूँदें,सूरज का आलिंगन,जीवन झलके। पगडंडी

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हाइकु/सेदोका

बारिश हो या तूफान, आराम नहीं करेंगे

बारिश की बूँद,संकल्प अडिग रहे,पथ मुस्काए। तूफानी रात,दीपक फिर भी जले,हौसला अटल। कदम बढ़ते,मंज़िल पुकारे,मन न रुके। कड़ी धूप में,पसीना

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हाइकु/सेदोका

जिंदगी किराए का मकान है

जिंदगी ठहरी,किराए का घर,क्षणभर का। आए अकेले,जाना भी होगा,मौन पथिक। दीवार बोली,रिश्तों की गूँज,क्षणिक रही। सपनों की छत,धूप-छाँव मिली,समय हँसा।

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