जाते ही श्मशान में मिट गई दूरियां
जीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन
Read Moreजीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन
Read Moreशरीर की भाषासांसों में उतरती शांतियोग का स्पर्श तन का हर तनावधीरे-धीरे मिट जाताआसन के संग मन की उलझनेंजैसे धुंध
Read Moreरोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के
Read Moreधीरे से उतरती हैरात की रेशमी चादर परतुम्हारी याद की आहट बोलते नहीं लफ़्ज़फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैंनज़रों
Read Moreखामोश सड़कों परटूटे हुए सपनों की परछाइयाँधीरे-धीरे चलती हैं चाँद भी आज उदास हैरात की आँखों मेंएक अनकहा दर्द है
Read Moreरिश्तों की चुपचापएक मीठी सी हवादिल को छू जाती है बिना कहे भी सबबहुत कुछ कह जाते हैंअपनेपन के रंग
Read Moreशहरीकरण आधुनिक सभ्यता के विकास की सबसे प्रमुख विशेषता बन चुका है। यह आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और
Read Moreरिश्तों की डोरधीरे-धीरे टूटे,शब्दों की मार। मन के आँगनविश्वास के दीपकक्यों बुझ जाते। चेहरे हँसते,भीतर मौन हिंसाघर बना लेती। क्रोध
Read Moreचुप्पियों के बीचजब शब्द साँस लेते हैंवही गुफ्तगू है नज़रें कह देती हैंजो होंठ नहीं कह पातेभावों की भाषा हवा
Read Moreरिश्तों की डोरमौन में भी बोलती हैदिल की भाषा में एक मुस्कान सेटूटे पल जुड़ जाते हैंनर्म एहसास में समय
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