शिक्षा पर पहरा नहीं, समान अवसर का सवेरा चाहिए
किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आर्थिक समृद्धि, ऊँची इमारतों या आधुनिक तकनीक से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस
Read Moreकिसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आर्थिक समृद्धि, ऊँची इमारतों या आधुनिक तकनीक से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस
Read Moreओस की बूँद,भोर मुस्काए,सुगंध अमर। वन की साँस,पत्ते गुनगुन,जीवन जागे। नभ निर्मल,चिड़िया का स्वर,मन महके। शांत सरिता,लहरें बोलें,काल ठहरे। फूल
Read Moreयत्र तत्र,जीवन की धुन,प्रकृति गाए। शीतल पवन,पत्तों की भाषा,मन मुस्काए। नीला गगन,उड़ते पंछी,स्वप्न सजाएँ। ओस की बूँद,सूरज की किरण,मोती बन
Read Moreधूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र
Read Moreओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती
Read Moreपुरानी राहें,धूप में सोई हुई,मन टटोलता। सूखे पत्तों में,बीते वर्षों की गूँज,धीरे बहती। खिड़की के पास,चाँदनी चुपके उतरे,स्मृतियाँ जागें। बरगद
Read Moreजीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन
Read Moreशरीर की भाषासांसों में उतरती शांतियोग का स्पर्श तन का हर तनावधीरे-धीरे मिट जाताआसन के संग मन की उलझनेंजैसे धुंध
Read Moreरोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के
Read Moreधीरे से उतरती हैरात की रेशमी चादर परतुम्हारी याद की आहट बोलते नहीं लफ़्ज़फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैंनज़रों
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