स्वार्थी और ईर्ष्यालु स्वभाव के व्यक्ति,
ऐसे लोग जो केवल अपने फायदे के बारे में सोचते हैं और दूसरों की खुशी देखकर जलते हैं, समाज और परिवार के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण होते हैं। उनके व्यवहार में ‘मैं’ और ‘मेरा’ की भावना इतनी प्रबल होती है कि वे रिश्तों की गरिमा और महत्व को पूरी तरह भूल जाते हैं।
आत्म-केंद्रित व्यवहार (Self-Centeredness) होता है इनका, मक़सद सिर्फ अपना फायदा बस,,,
ऐसे व्यक्ति हर स्थिति को केवल अपने लाभ की दृष्टि से देखते हैं। उनके लिए दूसरों की भावनाएं या जरूरतें कोई मायने नहीं रखतीं। उन्हें लगता है कि पूरी दुनिया उनके इर्द-गिर्द घूमनी चाहिए।
ईर्ष्या और जलन की भावना इनके अंदर कूट कूट कर भरी होती हैं भले बनते हैं भले होते नहीं है,ये लोग,
जब वे किसी दूसरे को सफल या खुश देखते हैं, तो उनके मन में प्रशंसा के बजाय हीन भावना और जलन पैदा होती है। वे दूसरों की खुशी में शामिल होने के बजाय, उसमें कमियां निकालने या उसे खराब करने की कोशिश करते हैं।
रिश्तों की अनदेखी करने से नहीं चूकते दिखा देते हैं अपनों को,
रिश्ते प्रेम, त्याग और विश्वास पर टिके होते हैं, लेकिन स्वार्थी व्यक्ति के लिए रिश्ता केवल एक ‘साधन’ होता है। जब तक उनका मतलब निकलता है, वे साथ रहते हैं, और मतलब खत्म होते ही वे रिश्तों को दरकिनार कर देते हैं।
अपनों के प्रति विश्वासघात करने से ये गुरेज नहीं करते,बदतमीज होते हैं,
सबसे दुखद पहलू यह है कि अपने स्वार्थ के लिए ऐसे लोग ‘खून के रिश्तों’ की परवाह भी नहीं करते। अपने छोटे से फायदे के लिए वे परिवार में फूट डालने या अपनों का नुकसान करने से भी पीछे नहीं हटते।
अंततःऐसा व्यवहार व्यक्ति को मानसिक रूप से अकेला कर देता है। भले ही वे कुछ समय के लिए भौतिक लाभ पा लें, लेकिन वे जीवन का असली सुख, यानी ‘शांति’ और ‘सच्चा प्रेम’ कभी हासिल नहीं कर पाते। ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना और खुद को इनके नकारात्मक प्रभाव से बचाना ही समझदारी है।
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह
